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प्यार में धोखा और एक ई-मेल ने खोल दी MPSC पेपर लीक की पोल

प्यार में धोखा और एक ई-मेल ने खोल दी MPSC पेपर लीक की पोल

एक तरफ प्यार की कसमें और दूसरी तरफ सरकारी नौकरी का सपना। जब ये दोनों चीजें आपस में टकराती हैं, तो कई बार ऐसे राज़ से पर्दा उठता है जिस पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। महाराष्ट्र में एक असफल प्रेम कहानी ने सिस्टम के सबसे बड़े सुरक्षा घेरे को भेदकर रख दिया। जी हां, महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का पेपर लीक कांड किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है, जहां विलेन कोई बाहरी व्यक्ति नहीं बल्कि खुद टूटा हुआ दिल और ई-मेल पर भेजा गया एक संदेश था।

कैसे शुरू हुई इस सनसनीखेज खुलासे की कहानी?

मामला MPSC द्वारा आयोजित ड्रग इंस्पेक्टर, ग्रुप-बी (खाद्य और औषधि प्रशासन विभाग) परीक्षा से जुड़ा है। यह परीक्षा 22 मार्च को महाराष्ट्र के छह अलग-अलग संभाग मुख्यालयों पर ऑफ़लाइन आयोजित की गई थी। इसके परिणाम 12 जून को घोषित किए गए, जिसमें 506 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन पर्दे के पीछे कुछ ऐसा पक रहा था जिसने पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा दिया।

इस पूरे फर्जीवाड़े के केंद्र में थीं एक उम्मीदवार रुतुजा पाटिल और उनके पिता अमृत पाटिल। जांच में सामने आया कि अमृत पाटिल ने नंदुरबार के एक कोचिंग इंस्टीट्यूट संचालक प्रवीण पाटिल से अपनी बेटी के लिए परीक्षा का प्रश्नपत्र पहले ही खरीद लिया था। इस सौदेबाजी के शुरुआती चरण में 500,000 रुपये का लेन-देन हुआ, जबकि कुल सौदा लगभग 12 लाख रुपये का तय हुआ था.

प्यार, धोखा और ब्रेकअप का वह मोड़

रुपये चुकाकर प्रश्नपत्र हासिल करने के बाद रुतुजा ने अपनी सफलता सुनिश्चित करने के लिए उसे अपने उस समय के बॉयफ्रेंड गौरव पाटिल के साथ भी शेयर किया। लेकिन कहते हैं न कि भ्रष्टाचार के रास्ते पर चलकर मंजिल पाना आसान नहीं होता। परीक्षा में रुतुजा पाटिल का चयन तो हो गया, विडंबना यह रही कि वही प्रश्नपत्र देखने के बावजूद गौरव पाटिल परीक्षा पास करने में असफल रहा।

इस असफलता के बाद दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगीं और बात ब्रेकअप तक पहुंच गई। गौरव के मन में यह डर बैठ गया कि सरकारी नौकरी मिलने के बाद उसकी प्रेमिका उसे छोड़कर आगे बढ़ जाएगी और उसकी जिंदगी से दूर हो जाएगी। इसी ईर्ष्या, गुस्से और धोखे की भावना में आकर गौरव ने अपनी ही पूर्व प्रेमिका और उसके परिवार को सबक सिखाने का फैसला किया। उसने गुस्से में आकर MPSC को एक ई-मेल भेज दिया, जिसमें परीक्षा के पेपर लीक होने की पोल खोल दी गई थी।

जांच आगे बढ़ी तो उड़े होश

हालाँकि, बाद में गौरव को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने अपनी शिकायत वापस लेने की कोशिश भी की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। MPSC और पुलिस तंत्र हरकत में आ चुका था। जब मामले की गहराई से जांच की गई, तो परत-दर-परत ऐसे खुलासे हुए जिन्होंने सबको चौंका दिया।

जांच में पता चला कि परीक्षा से ठीक पहले विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए प्रश्न बैंक से जानबूझकर और अवैध रूप से चुनिंदा सवाल हटाए गए थे। इसके बाद एक नया प्रश्नपत्र तैयार कर उसे गुप्त रूप से उन लोगों को बेचा गया जिन्होंने इसके लिए भारी-भरकम कीमत चुकाई थी।

गिरफ्तारियों का दौर और कानून का शिकंजा

इस मामले में इस हफ्ते की शुरुआत में भारतीय दंड संहिता (IPC), महाराष्ट्र प्रतियोगी परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत कड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस रैकेट से जुड़े छह मुख्य आरोपियों को धर दबोचा:

  • विश्वेश्वर दत्तात्रेय नकाते: सहायक कक्ष अधिकारी (ASO), MPSC
  • अभिजीत गणपतराव लेंदवे: अवर सचिव (Under Secretary), MPSC
  • गोपाल भत्तु मराठे: सहायक कक्ष अधिकारी (ASO), MPSC
  • प्रवीण दिलीप पाटिल: निदेशक, कौटिल्य अकादमी, नंदुरबार (मुख्य सरगना)
  • अमृत नामदेव पाटिल: उम्मीदवार रुतुजा पाटिल के पिता
  • गौरव पाटिल: व्हिसलब्लोअर और रुतुजा के पूर्व बॉयफ्रेंड

इन सभी आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें 2 सितंबर तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। अदालत और जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस सिंडिकेट की जड़ें कहां-कहां तक फैली हुई हैं और इसमें और कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल हो सकते हैं।

MPSC ने पूरी भर्ती प्रक्रिया की रद्द

इस पेपर लीक कांड के सार्वजनिक होने और बढ़ते विवाद के बाद महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने ड्रग इंस्पेक्टर, ग्रुप-बी के पदों के लिए चल रही पूरी भर्ती प्रक्रिया को ही रद्द करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है।

आयोग को 22 जुलाई से 26 जुलाई के बीच कई उम्मीदवारों और जनप्रतिनिधियों से शिकायतें मिली थीं, जिनमें आरोप लगाया गया था कि परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से दो दिन पहले ही कुछ लोगों के हाथों लग गया था और उसे सोशल मीडिया तथा इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म्स के जरिए धड़ल्ले से शेयर किया गया था। इन शिकायतों और प्राथमिक जांच के पुख्ता सबूत मिलने के बाद आयोग ने दूषित चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय इसे सिरे से खारिज करना ही बेहतर समझा।

छात्रों के लिए राहत भरी खबर

भर्ती प्रक्रिया रद्द होने से उन ईमानदार और मेहनती छात्रों को गहरा झटका जरूर लगा है जो लंबे समय से इस परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, लेकिन आयोग ने एक राहत भरा ऐलान भी किया है। MPSC ने स्पष्ट किया है कि इस परीक्षा का आयोजन दोबारा (Re-examination) किया जाएगा। सबसे अच्छी बात यह है कि जिन उम्मीदवारों ने इसके लिए पहले ही आवेदन किया था, उन्हें दोबारा आवेदन करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी और न ही उनसे किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क वसूला जाएगा।

यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि भ्रष्टाचार और बेईमानियों की दीवारें कितनी भी मजबूत क्यों न हों, आपसी रंजिश, लालच या इंसान की अपनी गलतियां अक्सर बड़े से बड़े घोटालों का पर्दाफाश कर देती हैं। फिलहाल, राज्य में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि कैसे एक असफल प्रेम प्रसंग ने महाराष्ट्र के सबसे प्रतिष्ठित आयोग के भीतर चल रहे खेल को सबके सामने ला खड़ा किया।

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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

Content Writer

अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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