Punjab Political Crisis: पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले अपनी जमीन मजबूत करने में जुटी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बड़ा झटका लगा है। हाल ही में पंजाब कांग्रेस में मचे बवाल की तर्ज पर अब बीजेपी के अंदर भी कलह चरम पर पहुंच गई है। राज्य में नई टीम और जिला प्रभारियों की घोषणा होते ही बगावत का दौर शुरू हो गया है और कई बड़े नेताओं ने इस्तीफे थमा दिए हैं।
पुराने दिग्गजों की अनदेखी से भड़का आक्रोश
पार्टी नेतृत्व द्वारा जारी नई सूची के बाद होशियारपुर से तीन बार विधायक रहे पूर्व मंत्री तीक्ष्ण सूद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके पार्टी हाईकमान की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। वहीं, लुधियाना से बीजेपी किसान सेल के राष्ट्रीय स्तर के वरिष्ठ नेता सुखमिंदर पाल सिंह ग्रेवाल ने पद से इस्तीफा देकर बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है। नेताओं का सीधा आरोप है कि सालों से पार्टी के लिए पसीना बहाने वाले वफादार कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया जा रहा है।
किन-किन जिलों में बढ़ा विवाद?
पंजाब के कई हिस्सों से जिला कार्यकारिणी के गठन को लेकर विरोध के सुर तेज हो गए हैं:
- संगरूर-1: मतिंदर सिंह को महज 14 दिन के भीतर जिला प्रधान के पद से हटा दिया गया और सरजीवन जिंदल को जिम्मेदारी सौंप दी गई, जिससे समर्थकों में काफी गुस्सा है।
- होशियारपुर (देहाती व शहरी): वरिष्ठ नेताओं ने खुलकर नई नियुक्तियों को अनुभवहीन करार दिया है।
- पटियाला, फरीदकोट और रोपड़: इन जिलों से भी स्थानीय स्तर पर विरोध और इस्तीफों की खबरें सामने आ रही हैं।
बेअसर साबित हुआ सतीश पूनिया का फॉर्मूला
उल्लेखनीय है कि जब पार्टी ने केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब की कमान सौंपी थी, तभी से दबी जुबान में विरोध शुरू हो गया था। इस बगावत को दबाने के लिए हाईकमान ने हरियाणा के प्रभारी सतीश पूनिया को पंजाब के पूर्व अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं से तालमेल बिठाकर नई टीम की रूपरेखा बनाने का जिम्मा दिया था। लेकिन जमीनी नतीजों से साफ है कि पूनिया की रणनीति काम नहीं आई और वे कार्यकर्ताओं के आक्रोश को भांपने में नाकाम रहे।
संगठन मंत्री के प्रति गहराया असंतोष
पार्टी सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया पर भी बीजेपी प्रदेश नेतृत्व और खास तौर पर संगठन मंत्री मंथरी श्रीनिवासुलू के खिलाफ गुस्सा निकाला जा रहा है। दबी जुबान में कई पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भी संगठन मंत्री की कार्यप्रणाली से नाराज बताए जा रहे हैं।
लुधियाना बैठक पर टिकी सबकी निगाहें
नवनियुक्त पदाधिकारियों की अगली महत्वपूर्ण बैठक लुधियाना में होने वाली है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बैठक में यह असंतोष और उग्र रूप ले सकता है। 2027 के चुनाव में अकेले दम पर सरकार बनाने का दावा कर रही भाजपा के लिए अपनों की यह नाराजगी एक बड़ी आफत साबित हो सकती है।