राजस्थान की मादक पदार्थों की तस्करी का वह शातिर चेहरा, जो कानून की नजरों से बचने के लिए पड़ोसी राज्य में आम जिंदगी का मुखौटा पहनकर छिपा बैठा था, आखिरकार खाकी के शिकंजे में आ ही गया।
अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले अपराधी अक्सर अपनी पहचान छिपाने के लिए नए ठिकाने तलाशते हैं। कोई नाम बदलता है, तो कोई हुलिया। लेकिन जब जुर्म की जड़ें गहरी होती हैं, तो कानून का हाथ उन तक पहुंच ही जाता है। कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है राजस्थान से, जहां एक वांटेड ड्रग तस्कर पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए मध्य प्रदेश पहुंच गया और वहां एक साधारण फर्नीचर व्यापारी की तरह अपनी जिंदगी गुजारने लगा।
अलग-अलग शहरों में ठिकाने बदलकर काट रहा था फरारी
ड्रग्स तस्करी के एक बड़े मामले में वांछित चल रहे आरोपी विश्ना राम (Vishna Ram) की तलाश पिछले काफी समय से राजस्थान पुलिस को थी। पुलिस रिकॉर्ड में वह एक ऐसा नाम बन चुका था, जिसकी तलाश में कई जिलों की पुलिस खाक छान रही थी। जांच एजेंसियों के मुताबिक, जब उसके खिलाफ गिरफ्तारी के वारंट जारी हुए और पुलिस ने दबिश देना शुरू किया, तो उसने तुरंत अपनी रणनीति बदल दी।
शुरुआती दिनों में विश्ना राम ने राजस्थान के ही भीतर अपनी लोकेशन बार-बार बदली। कभी वह जोधपुर के किसी सुनसान इलाके में किराए के मकान में छिपकर रहता, तो कभी अपने किसी दूर के रिश्तेदार के घर शरण लेता। पुलिस से बचने के लिए उसने मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना लगभग बंद कर दिया था ताकि उसकी डिजिटल लोकेशन ट्रेस न हो सके।
मध्य प्रदेश में शुरू की नई जिंदगी
राजस्थान में पुलिस का शिकंजा लगातार कसता देख विश्ना राम ने राज्य की सीमा पार करने का फैसला किया। वह चुपचाप मध्य प्रदेश के एक शांत इलाके में जा पहुंचा। वहां उसने अपनी पुरानी आपराधिक पहचान को पूरी तरह दफन कर दिया और एक नया मुकाम शुरू किया।
मध्य प्रदेश के उस शहर में किसी को कान-कान खबर नहीं थी कि जो शख्स लकड़ी के बक्से, सोफे और पलंग बेच रहा है, असल में वह राजस्थान की पुलिस की हिट लिस्ट में सबसे ऊपर चल रहा एक कुख्यात ड्रग्स तस्कर है। उसने बाकायदा एक फर्नीचर की दुकान खोली, स्थानीय लोगों के साथ अच्छे संबंध बनाए और एक सम्मानित व्यापारी की तरह दिन बिताने लगा। उसने अपनी रोजमर्रा की जिंदगी को इतना सामान्य बना लिया था कि कोई यह सोच भी नहीं सकता था कि उसका अतीत कितना दागदार है।
पुलिस की खुफिया नजर और ऑपरेशन का खाका
कहते हैं कि अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, वह अपनी एक छोटी सी गलती से ही पहचाना जाता है। राजस्थान पुलिस की एक विशेष खुफिया इकाई (Intelligence Unit) लगातार इस मामले पर काम कर रही थी। तकनीक और मुखबिरों के नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए पुलिस ने आखिरकार विश्ना राम के नए आशियाने और उसकी नई पहचान का सुराग ढूंढ ही निकाला।
जैसे ही पुलिस को पुख्ता इनपुट मिला कि जोधपुर और अन्य जिलों में वांछित चल रहा आरोपी मध्य प्रदेश में फर्नीचर के कारोबार की आड़ में रह रहा है, तो एक विशेष कार्य दल (Task Force) का गठन किया गया। इस ऑपरेशन को बेहद गोपनीय रखा गया ताकि आरोपी को संभलने का मौका न मिल सके।
दुकान पर बैठे-बैठे धरा गया शातिर तस्कर
कार्रवाई के दौरान मध्य प्रदेश पहुंची राजस्थान पुलिस की टीम ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर उस इलाके की घेराबंदी की जहां विश्ना राम की दुकान थी। सादे लिबास में पहुंचे पुलिसकर्मियों ने पहले स्थिति का जायजा लिया। जब यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि काउंटर पर बैठा शख्स वही वांछित अपराधी है, तो पुलिस ने बिना किसी शोर-शराबे के उसे दबोच लिया।
अचानक हुई इस कार्रवाई से विश्ना राम को संभलने का मौका तक नहीं मिला। उसने अपनी नई पहचान का हवाला देकर बचने की कोशिश की, लेकिन पुलिस के पास उसके बायोमेट्रिक और अन्य पुख्ता सबूत मौजूद थे। इसके बाद उसे तुरंत हिरासत में ले लिया गया और ट्रांजिट रिमांड पर राजस्थान लाया जा रहा है।
मादक पदार्थों के नेटवर्क पर और बड़े खुलासे होने की उम्मीद
विश्ना राम की गिरफ्तारी के बाद पुलिस महकमे में राहत की सांस ली गई है। अधिकारियों का मानना है कि उससे पूछताछ के दौरान मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े कई अन्य बड़े नामों का खुलासा हो सकता है। यह सिंडिकेट कितना बड़ा था और इसके तार किन-किन राज्यों से जुड़े हैं, इस बारे में भी पुलिस गहरी पूछताछ करेगी।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि कानून के लंबे हाथों से बचना किसी भी अपराधी के लिए नामुमकिन है, भले ही वह अपनी पहचान बदलकर कितनी भी दूर क्यों न चला जाए।