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सदी का सबसे खतरनाक अल नीनो: भारत के मानसून पर मंडराया बड़ा खतरा

सदी का सबसे खतरनाक अल नीनो: भारत के मानसून पर मंडराया बड़ा खतरा

प्रशांत महासागर के गर्म होते पानी ने दुनिया भर के मौसम वैज्ञानिकों की नींद उड़ा दी है। मौसम विज्ञान के गलियारों से मिल रही ताजा और डरावनी रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार जो अल नीनो (El Nino) अपनी दस्तक दे रहा है, वह पिछले एक सदी यानी 100 सालों में सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। इस प्राकृतिक परिघटना का सीधा और गंभीर असर भारत के आगामी मानसून पर पड़ने की पूरी आशंका जताई जा रही है।

भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले कृषि क्षेत्र पर इस बार बादलों के छाए संकट ने किसानों से लेकर नीति निर्माताओं तक की चिंता बढ़ा दी है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर यह अल नीनो बला क्या है और क्यों इस बार इसका रूप इतना डरावना माना जा रहा है।

आखिर क्या होता है अल नीनो और क्यों है यह खतरनाक?

सरल शब्दों में समझें तो अल नीनो एक ऐसी मौसमी प्रक्रिया है जिसमें प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। जब भूमध्य रेखा के पास प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ता है, तो हवाओं का पैटर्न पूरी तरह बदल जाता है। सामान्य वर्षों में जो मानसूनी हवाएं भारत की तरफ रुख करती हैं, वे इस गर्मी के प्रभाव से कमजोर पड़ जाती हैं।

इस बार वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रशांत महासागर में तापमान में जो वृद्धि दर्ज की गई है, वह पिछले 100 सालों के रिकॉर्ड तोड़ रही है। जब महासागर का तापमान जरूरत से ज्यादा गर्म होता है, तो भारत में मानसूनी हवाओं की ताकत कम हो जाती है, जिससे बारिश या तो समय से बहुत पहले थम जाती है या फिर बहुत कम होती है।

भारतीय मानसून पर अल नीनो का सीधा प्रहार

भारत में कृषि का बहुत बड़ा हिस्सा दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश पर निर्भर करता है। देश के कई राज्य आज भी सिंचाई के लिए पूरी तरह मानसूनी बारिश पर आश्रित हैं। जब अल नीनो सक्रिय होता है, तो भारत में सूखे की स्थिति बनने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार का अल नीनो केवल बारिश की मात्रा को ही प्रभावित नहीं करेगा, बल्कि इसके वितरण (Distribution) को भी बिगाड़ देगा। इसका मतलब यह है कि देश के कुछ हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं, जबकि देश के बड़े हिस्से में सूखा पड़ सकता है। यह स्थिति कृषि और जल संसाधनों दोनों के लिए बेहद घातक साबित हो सकती है।

किन फसलों पर पड़ सकती है भारी मार?

खरीफ की फसलें, जो मानसून के मौसम में उगाई जाती हैं, इस संकट के केंद्र में हैं। यदि समय पर बारिश नहीं हुई या मानसून की विफलता लंबी खिंची, तो निम्नलिखित फसलों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है:

  • धान (चावल): धान की खेती के लिए पानी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। मानसून की बेरुखी से धान के उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।
  • दलहन और तिलहन: अरहर, उड़द, मूंग और सोयाबीन जैसी फसलें सूखे के प्रति बेहद संवेदनशील होती हैं। बारिश की एक कमी पूरी फसल को बर्बाद कर सकती है।
  • गन्ना और कपास: इन नकदी फसलों को भी समय पर सिंचाई की जरूरत होती है। भूजल स्तर गिरने से इनकी पैदावार पर भी गहरा असर पड़ेगा।

फसलों के खराब होने का सीधा मतलब है कि आने वाले दिनों में बाजार में सब्जियों, अनाजों और दालों की कीमतों में बेतहाशा तेजी देखने को मिल सकती है, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा बोझ पड़ेगा।

सरकार और किसानों के लिए चुनौतियां

इस संभावित संकट से निपटने के लिए कृषि विशेषज्ञों और सरकारी एजेंसियों ने अभी से मंथन शुरू कर दिया है। सरकार का जोर इस बात पर है कि किसानों को समय रहते कम पानी में पकने वाली फसलों के बीजों की जानकारी दी जाए। साथ ही, भूजल के संरक्षण और सिंचाई के वैकल्पिक साधनों को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

"अल नीनो का यह दौर केवल मौसम का चक्र नहीं है, बल्कि यह हमारी खाद्य सुरक्षा के लिए एक बड़ी परीक्षा है। किसानों को समय रहते मौसम विभाग की चेतावनियों के आधार पर अपनी रणनीति बदलनी होगी।" - वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक

भविष्य के लिए तैयारी कितनी जरूरी?

जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के इस दौर में मौसम की अनिश्चितता लगातार बढ़ती जा रही है। 100 साल का सबसे खतरनाक अल नीनो इस बात की चेतावनी है कि हमें अपनी कृषि प्रणाली को अधिक लचीला (Resilient) बनाना होगा। ड्रिप इरिगेशन, वॉटर हार्वेस्टिंग और सूखा-प्रतिरोधी बीजों का इस्तेमाल अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन चुका है।

फिलहाल, देश की निगाहें मौसम विभाग (IMD) की आगामी रिपोर्टों पर टिकी हैं। आने वाले हफ्तों में यह साफ हो पाएगा कि यह अल नीनो भारत के किस हिस्से को सबसे ज्यादा प्रभावित करेगा। तब तक किसानों और प्रशासन दोनों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।

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काव्या त्रिपाठी

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Senior Editor

काव्या त्रिपाठी बिजनेस और टेक्नोलॉजी की जटिल दुनिया को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। वे आर्थिक बदलाव, स्टार्टअप इकोसिस्...

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