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यवतमाल में महिलाओं की ऐतिहासिक जीत: दुकान और बार बंद करने का आदेश

यवतमाल में महिलाओं की ऐतिहासिक जीत: दुकान और बार बंद करने का आदेश

महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के महागांव नगर पंचायत क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो देश भर की महिलाओं के लिए मिसाल बन गई है। यहां प्रभाग क्रमांक 1 में देशी शराब की दुकान और बैठक बार को आखिरकार स्थायी रूप से बंद करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इस फैसले के साथ ही स्थानीय महिलाओं के लंबे और कड़े संघर्ष को आखिरकार बड़ी सफलता मिल गई है।

जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठे थे सवाल

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब महागांव के इस रिहायशी इलाके में देशी शराब की दुकान को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) दे दिया गया। स्थानीय महिलाओं का आरोप था कि कुछ प्रभावशाली जनप्रतिनिधियों की संलिप्तता और मिलीभगत के कारण इस अवैध रूप से लगने वाली दुकान को हरी झंडी मिली। महिलाओं का कहना था कि शराब की दुकान खुलने से इलाके का माहौल खराब हो रहा था, जिससे युवा पीढ़ी और परिवारों पर बुरा असर पड़ रहा था।

इस फैसले के विरोध में महिलाओं ने चुप बैठने के बजाय सड़क पर उतरने का फैसला किया। नगरसेविका जयश्री संजय नरवाडे के नेतृत्व में महिलाओं ने एक मजबूत मोर्चा खोला और प्रशासन के खिलाफ लगातार आवाज बुलंद की।

लोकतंत्र की ताकत: जनमत संग्रह में हुआ फैसला

मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन के नियमानुसार इस पर जनमत संग्रह यानी मतदान कराया गया। यह लोकतंत्र की असली ताकत थी, जहां जनता ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल किया। इस मतदान में 50 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने देशी शराब की दुकान और परवाना कक्ष (बार) को पूरी तरह से बंद करने के पक्ष में अपना वोट डाला।

इस जनमत संग्रह के नतीजों को आधार बनाते हुए:

  • मुंबई शराबबंदी आदेश के नियमों का पालन किया गया।
  • 25 मार्च 2008 और 12 फरवरी 2009 को जारी हुई शासन की महत्वपूर्ण अधिसूचनाओं का हवाला दिया गया।

जिलाधिकारी का कड़ा निर्देश

कानूनी प्रक्रियाओं और जनमत के आधार पर यवतमाल के जिलाधिकारी ने कड़ा कदम उठाते हुए 18 अगस्त 2026 को आधिकारिक आदेश जारी किया। इस आदेश के तहत प्रभाग क्रमांक 1 में:

  • शुभम बाबूलाल जायसवाल, अनिलकुमार जायसवाल, कमलनयन जायसवाल और सारिका जायसवाल के नाम पर संचालित सीएल-3 (क्रमांक 153) देशी शराब की दुकान।
  • विवेक देशमुख के नाम पर संचालित एफएल-3 (क्रमांक 149) बैठक बार।

इन दोनों प्रतिष्ठानों के अंतर्गत होने वाले सभी व्यावसायिक लेन-देन और गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से बंद करने के सख्त निर्देश दिए गए।

अदालत और सुनवाई में चली लंबी कानूनी लड़ाई

यह फैसला रातों-रात नहीं आया। इसके पीछे एक लंबी कानूनी प्रक्रिया और दोनों पक्षों की मजबूत पैरवी शामिल थी। सुनवाई के दौरान:

  • शराब दुकान संचालकों यानी जायसवाल परिवार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कवीश्वर ने अपना पक्ष रखा।
  • प्रशासन की तरफ से तहसीलदार अभय मस्के और महागांव नगर पंचायत के मुख्याधिकारी ने न्यायालय के समक्ष तथ्य रखे।
  • दूसरी ओर, प्रभाग की महिलाओं का प्रतिनिधित्व करते हुए जयश्री संजय नरवाडे ने ऐतिहासिक 'आड़ी बाटली अभियान' की याद दिलाते हुए महिलाओं की पीड़ा और हकों को मजबूती से रखा।

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सोमवार तक पूरे इलाके में फैसले को लेकर भारी उत्सुकता और तनाव का माहौल था, लेकिन मंगलवार को जैसे ही स्थायी बंदी का आदेश आया, महिलाओं की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

महिलाओं में जश्न का माहौल

स्थायी बंदी के आदेश मिलते ही प्रभाग की महिलाओं ने ढोल-नगाड़ों और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर अपनी जीत का जश्न मनाया। आंदोलन की अगुवाई करने वाली जयश्री नरवाडे ने इस ऐतिहासिक फैसले के लिए जिला प्रशासन और न्यायपालिका का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह जीत अकेले किसी एक की नहीं, बल्कि महागांव की हर उस माँ और बहन की है जो अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित रखना चाहती थीं।

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अल्का सिंह

अल्का सिंह

Senior Content Writer

अल्का सिंह स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े विषयों पर गहन शोध के साथ लेखन करती हैं। उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को केवल सामान्य जानकारी ही नहीं, बल...

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