काशी विश्वनाथ धाम से गूंजा विश्व शांति का संदेश, भारत माता की प्रतिमा के सामने विशेष प्रार्थना
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काशी विश्वनाथ धाम से गूंजा विश्व शांति का संदेश, भारत माता की प्रतिमा के सामने विशेष प्रार्थना

काशी विश्वनाथ धाम से गूंजा विश्व शांति का संदेश, भारत माता की प्रतिमा के सामने विशेष प्रार्थना

वाराणसी की आध्यात्मिक और पौराणिक नगरी से सोमवार को एक बार फिर पूरी मानवता के लिए प्रेम, करुणा और सौहार्द का संदेश पूरी दुनिया में प्रसारित हुआ। अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ धाम परिसर में एक विशेष शांति प्रार्थना का आयोजन किया गया। इस दौरान देश के सांस्कृतिक वैभव के प्रतीक भारत माता की प्रतिमा के समक्ष एकत्र हुए नागरिकों ने दुनिया के कोने-कोने में चल रहे संघर्षों, युद्धों और हिंसा के दौर के बीच शांति की पुरजोर कामना की।

आज के दौर में जब वैश्विक पटल पर तनाव और अशांति का माहौल लगातार गहराता जा रहा है, तब प्राचीन नगरी काशी से निकला यह संदेश बेहद खास माना जा रहा है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वैश्विक भाईचारे को बढ़ावा देना और हिंसा के तमाम रूपों को नकारते हुए मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि रखना था।

काशी विश्वनाथ धाम से गूंजा 'वसुधैव कुटुंबकम' का संकल्प

श्री काशी विश्वनाथ धाम में आयोजित इस गरिमामयी और वैचारिक रूप से समृद्ध कार्यक्रम का संयोजन नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक तथा नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला द्वारा किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में शहर के प्रबुद्ध नागरिक, युवा और गंगा भक्त उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में भारत की प्राचीन और सनातन संस्कृति के मूल मंत्र ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (संपूर्ण पृथ्वी ही परिवार है) और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ (सभी सुखी हों) को दोहराया। मोक्षदायिनी गंगा के तट और बाबा विश्वनाथ के सान्निध्य में हुए इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि भारत हमेशा से ही पूरी दुनिया को जोड़ने और शांति स्थापित करने का मार्ग दिखाता रहा है।

संवाद और करुणा से ही संभव है स्थायी समाधान

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि काशी सदियों से सह-अस्तित्व, सहिष्णुता और लोककल्याण का जीवंत केंद्र रही है। आज जब दुनिया के कई हिस्से युद्ध और अशांति की आग में झुलस रहे हैं, तब आपसी संवाद, प्रेम और मानवीय सहयोग की भावना को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।

  • युद्ध और संघर्ष का सबसे भीषण और अमानवीय प्रभाव अंततः आम नागरिकों और मासूमों पर पड़ता है।
  • सीमाओं और मतभेदों से ऊपर उठकर मानवता को बचाने के लिए संवाद ही एकमात्र और सबसे प्रभावी माध्यम है।
  • भारत की आध्यात्मिक परंपराएं हमेशा से युद्ध के विरोध में और शांति के समर्थन में खड़ी रही हैं।
  • काशी की पावन भूमि से दिया गया यह संदेश आज के वैश्विक परिदृश्य में और अधिक प्रासंगिक हो गया है।

गंगा सेवक राजेश शुक्ला ने अपने संबोधन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि शांति केवल किसी एक राष्ट्र, क्षेत्र या समाज की व्यक्तिगत आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह पूरी मानव जाति की साझा और सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने आह्वान किया कि समाज में विभाजन पैदा करने वाली ताकतों को दरकिनार कर करुणा और भाईचारे के धागे को मजबूत करना होगा।

नागरिकों ने लिया मानवता के कल्याण का संकल्प

इस विशेष प्रार्थना सभा में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम के अंत में सभी ने मिलकर यह संकल्प लिया कि वे अपने दैनिक जीवन में भी शांति, अहिंसा और सहयोग की भावना को बढ़ावा देंगे तथा समाज में नफरत फैलाने वाली प्रवृत्तियों का विरोध करेंगे।

इस अवसर पर शिवानंद दीक्षित, विश्वनाथ धवन, रेखा दीक्षित, श्रीनिवास, अन्नपूर्णा देवी और विकास कुमार सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और श्रद्धालु मौजूद रहे। सभी की उपस्थिति ने इस आयोजन को एक जन-आंदोलन का रूप दे दिया, जिसका मुख्य ध्येय केवल और केवल वैश्विक शांति और मानव कल्याण था।

काशी की परंपरा और आधुनिक संदर्भ

काशी केवल मंदिरों और घाटों का शहर नहीं है, बल्कि यह चेतना का वह पुंज है जो संकट के हर दौर में दुनिया को राह दिखाता आया है। आधुनिक युग की आपाधापी और तकनीकी प्रगति के बीच जब इंसान-इंसान के बीच की दूरियां बढ़ रही हैं, तब काशी विश्वनाथ धाम से उठी शांति की यह गूंज निश्चित रूप से पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है।

कार्यक्रम का समापन इस विश्वास के साथ हुआ कि आने वाले समय में विश्व समुदाय हिंसा के मार्ग को त्यागकर सह-अस्तित्व और शांति के मार्ग पर चलेगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित, स्वस्थ और सुंदर दुनिया मिल सकेगी।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

Writer (स्थानीय खबरें)

रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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