वाराणसी के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले सीर गोवर्धनपुर क्षेत्र में स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। संत रविदास की पावन जन्मस्थली के समीप स्थित रविदास पार्क के पास का मुख्य मार्ग इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। मानसून के मौसम में जलभराव की भीषण मार झेलने वाली यह सड़क अब बारिश थमने के बाद धूल और जानलेवा गड्ढों के रूप में एक नया संकट बन चुकी है। स्थिति यह है कि इस रास्ते से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है और स्थानीय निवासियों तथा देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का जीवन बेहद कठिन हो गया है।
बारिश खत्म, लेकिन मुसीबतें बरकरार
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जब भी आसमान से बारिश की बूंदें गिरती हैं, यह मार्ग किसी तालाब में तब्दील हो जाता है। जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई होने के कारण यहां घुटनों तक पानी भर जाता है। राहगीरों और वाहन चालकों को इसी गंदे पानी के बीच से गुजरना पड़ता है। वहीं, जब बरसात का पानी सूखता है, तो सड़क की असल और जर्जर तस्वीर सामने आती है। पूरी सड़क पर बड़े-बड़े और गहरे गड्ढे उभर आए हैं, जो आए दिन दुर्घटनाओं को न्योता देते रहते हैं।
जैसे ही सड़क पर धूप खिलती है और मौसम साफ होता है, एक नई समस्या खड़ी हो जाती है। सड़क पर मौजूद मिट्टी और सूखे कीचड़ के कारण वाहनों की आवाजाही से धूल के भारी गुबार उड़ते हैं। यह धूल आसपास के हवा में इस कदर घुल जाती है कि पैदल चलना भी मुहाल हो जाता है।प्रमुख संपर्क मार्ग और श्रद्धालुओं की आवाजाही
यह मार्ग केवल एक मोहल्ले की गली नहीं है, बल्कि यह एक बेहद महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है जो बिहार, रमना, लौटूबीर मंदिर और कई अन्य नजदीकी इलाकों को आपस में जोड़ता है। इस मार्ग पर हर समय भारी ट्रैफिक रहता है। चूंकि यह संत रविदास की जन्मस्थली है, इसलिए यहां साल भर उत्तर प्रदेश के अलावा देश के कोने-कोने से और विदेशों से भी लाखों की संख्या में संत रविदास के अनुयायी और श्रद्धालु पहुंचते हैं।
जब बाहर से आने वाले श्रद्धालु इस टूटी-फूटी सड़क और उड़ती हुई धूल के बीच से गुजरते हैं, तो वाराणसी की एक बेहद नकारात्मक छवि उनके मन में जाती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दुनिया भर में अपनी संस्कृति और भव्यता के लिए पहचाने जाने वाले शहर में इस तरह की बुनियादी समस्याओं का होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है।धरना-प्रदर्शन और शिकायतों के बाद भी सिफर नतीजा
इस सड़क की मरम्मत की मांग कोई नई नहीं है। स्थानीय जनता पिछले कई महीनों से लगातार प्रशासनिक अधिकारियों और क्षेत्र के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों के चक्कर काट रही है। सड़क को दुरुस्त कराने की मांग को लेकर कई बार स्थानीय लोगों ने धरना-प्रदर्शन भी किया, लेकिन आश्वासन के सिवाय उन्हें कुछ नहीं मिला। हर साल बरसात के मौसम में वही पुरानी कहानी दोहराई जाती है—पहले जलभराव, फिर कीचड़ और अंत में जानलेवा गड्ढे व धूल।
स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों का दर्द
क्षेत्रीय निवासी राजेश यादव ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि इस इलाके का धार्मिक और राजनीतिक रूप से बहुत महत्व है। यहां देश के प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, तमाम बड़े केंद्रीय मंत्री और स्थानीय विधायक अक्सर आते-जाते रहते हैं। वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान सड़कों को चमका दिया जाता है, लेकिन आम जनता के रोजाना इस्तेमाल होने वाले इस मुख्य मार्ग की सुधि लेने वाला कोई नहीं है। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय विधायक और स्थानीय पार्षद को लिखित रूप से इस समस्या से कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन सिवाय झूठे आश्वासनों के जनता के हाथ कुछ नहीं लगा।
सड़क किनारे दुकानदारी करने वाले छोटे व्यापारियों का हाल तो और भी बुरा है। सड़क पर उड़ने वाली धूल सीधे तौर पर दुकानों के अंदर रखी खाने-पीने की चीजों पर जाकर बैठ रही है।
- दुकानदारों को अपनी खाद्य सामग्री को बचाने के लिए पन्नी या कपड़ों से ढककर रखना पड़ रहा है।
- धूल उड़ने के कारण ग्राहकों ने भी इस मार्ग की दुकानों पर आना कम कर दिया है, जिससे दुकानदारों के व्यापार पर भारी असर पड़ा है।
- लगातार धूल फांकने से आसपास के बुजुर्गों और बच्चों में सांस संबंधी बीमारियां और एलर्जी का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है।
प्रशासन से जनता की दो टूक मांग
संत रविदास जन्मस्थली क्षेत्र के लोगों ने अब एक बार फिर संबंधित विभाग और जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मार्ग का सुंदरीकरण और पक्कीकरण नहीं कराया गया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। जनता की मांग है कि:
- संबंधित विभाग के अधिकारी तुरंत मौके पर आकर सड़क का भौतिक निरीक्षण करें।
- युद्ध स्तर पर अभियान चलाकर सड़क के तमाम बड़े गड्ढों को भरा जाए और मार्ग को समतल किया जाए।
- सड़क पर उड़ रही धूल से राहत पाने के लिए नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाए।
- भविष्य में जलभराव की समस्या से स्थाई रूप से निजात पाने के लिए मजबूत ड्रेनेज (नाली) सिस्टम बनाया जाए।
अब देखना यह होगा कि प्रशासनिक अमला और जनप्रतिनिधि जनता की इस बुनियादी पुकार को कब सुनते हैं और कब इस मार्ग पर चलने वाले लाखों लोगों को नरकीय जीवन से मुक्ति मिलती है।