35 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं के शरीर में होने वाले बदलावों को संतुलित करने के लिए 8 आवश्यक पोषक तत्वों और स्वास्थ्य से जुड़ी पूरी जानकारी पढ़ें।
35 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं के शारीरिक स्वास्थ्य, हड्डियों की मजबूती और हार्मोनल संतुलन को बनाए रखने के लिए आयरन, प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन डी समेत आठ विशेष पोषक तत्वों को दैनिक आहार में शामिल करना बेहद आवश्यक है।
महिलाओं की उम्र बढ़ने के साथ उनके शरीर की पोषण संबंधी जरूरतें प्राकृतिक रूप से बदलने लगती हैं। पैंतीस वर्ष की आयु पार करने के बाद मांसपेशियों के संरक्षण, हड्डियों के घनत्व, हार्मोनल बदलाव और ऊर्जा के स्तर पर विशेष ध्यान देना जरूरी हो जाता है। विशेष तौर पर पेरिमेनोपॉज और मेनोपॉज के इस दौर में एस्ट्रोजन हार्मोन में उतार-चढ़ाव का सीधा असर हड्डियों के स्वास्थ्य और मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है। हालांकि, हर महिला को कृत्रिम सप्लीमेंट्स की आवश्यकता हो यह जरूरी नहीं है, क्योंकि एक संतुलित और पौष्टिक आहार के जरिए इन पोषक तत्वों की कमी को आसानी से पूरा किया जा सकता है।
हड्डियों और मांसपेशियों से जुड़े प्रमुख पोषक तत्व
उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। हड्डियों और दांतों को मजबूत रखने के लिए कैल्शियम मुख्य भूमिका निभाता है। इसकी पूर्ति के लिए दूध, दही, पनीर, रागी, तिल, सोयाबीन और हरी पत्तेदार सब्जियों को अपने खान-पान का हिस्सा बनाना चाहिए। वहीं, शरीर को कैल्शियम को ठीक से अवशोषित करने के लिए विटामिन डी की आवश्यकता होती है। यह मांसपेशियों और हड्डियों के सामान्य कामकाज को भी सुचारू रखता है। धूप के अलावा विटामिन डी से फोर्टिफाइड दूध, अंडे और कुछ प्रकार के मशरूम इसके अच्छे विकल्प हैं।
उम्र के इस पड़ाव पर मांसपेशियों के प्राकृतिक नुकसान को रोकने के लिए प्रोटीन बेहद जरूरी है। पर्याप्त प्रोटीन और नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से मांसपेशियों की मजबूती और रिकवरी में मदद मिलती है। इसके लिए दालें, चना, राजमा, सोया उत्पाद, पनीर, दूध, दही, अंडे, मछली और चिकन का सेवन करना फायदेमंद रहता है। इसके साथ ही, मैग्नीशियम भी मांसपेशियों और नसों के कामकाज, ऊर्जा उत्पादन और हड्डियों की सेहत को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है, जिसे बादाम, काजू, कद्दू के बीज, साबुत अनाज और डार्क चॉकलेट से प्राप्त किया जा सकता है।
रक्त संचार, ऊर्जा और अन्य जरूरी विटामिन्स
शरीर के विभिन्न हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने वाले हीमोग्लोबिन के निर्माण में आयरन की प्रमुख भूमिका होती है। जिन महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव की समस्या होती है, उनमें आयरन की कमी का जोखिम अधिक रहता है। थकान, कमजोरी और चक्कर आना इसके प्रमुख लक्षण हैं। पालक, चना, राजमा, दालें, कद्दू के बीज और चिकन इसके अच्छे स्रोत हैं। आयरन के बेहतर अवशोषण के लिए इसके साथ नींबू, आंवला या अमरूद जैसे विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ भी खाने चाहिए।
शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और तंत्रिका तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन बी12 आवश्यक है, जिसकी कमी शाकाहारी और वीगन डाइट लेने वाली महिलाओं में अधिक देखी जाती है। इसके अलावा, विटामिन बी9 यानी फोलेट नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है, जो गर्भधारण की योजना बना रही महिलाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इसे हरी पत्तेदार सब्जियों, मसूर दाल, एवोकाडो और खट्टे फलों के जरिए लिया जा सकता है।
हृदय और मानसिक स्वास्थ्य के लिए हेल्दी फैट
ओमेगा-3 फैटी एसिड हृदय और मस्तिष्क के सामान्य कामकाज को सुचारू रखने वाले जरूरी हेल्दी फैट्स हैं। चूंकि शरीर इनका पर्याप्त निर्माण खुद नहीं कर पाता, इसलिए इन्हें आहार के माध्यम से लेना आवश्यक होता है। अलसी के बीज, अखरोट, चिया सीड्स और मछली के सेवन से ओमेगा-3 की कमी को पूरा किया जा सकता है।
35 की उम्र के बाद खान-पान में कुछ अन्य बातों का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। हर मुख्य भोजन में प्रोटीन का कोई न कोई स्रोत जरूर शामिल करें। रोजाना अलग-अलग रंगों के फल और ताजी सब्जियां खाएं, साबुत अनाज और फाइबरयुक्त खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और प्रोसेस्ड तथा पैक्ड फूड से दूरी बनाए रखें। इसके साथ ही, सप्ताह में नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें। यदि आयरन, विटामिन बी12 या विटामिन डी की कमी के कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।