कम बारिश और कीट प्रकोप के चलते गड़चिरोली में धान का उत्पादन आधा रह गया है, जिससे किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
महाराष्ट्र के गड़चिरोली जिले में इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव, मानसून के दौरान लंबे अंतराल और कम बारिश के कारण कृषि पर विपरीत असर पड़ा है। स्थिति यह है कि जिले की दो तहसीलों को सूखाग्रस्त सूची में भी शामिल किया गया है। बारहमासी नदियों की मौजूदगी के बावजूद सिंचाई सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण यहां के किसानों को मुख्य रूप से मानसूनी बारिश पर ही निर्भर रहना पड़ता है। इस प्राकृतिक आपदा और जल संकट के बीच कीटों के भारी प्रकोप ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
फसल पर कीटों का हमला और उत्पादन में भारी गिरावट
कृषि जानकारों और स्थानीय किसानों के अनुसार, इस सीजन में मौसम में लगातार हुए बदलाव और कम बारिश के चलते धान की फसल पर तना छेदक कीट, करपा रोग और तुडतुड़ा (ब्राउन प्लांट हॉपर) का गंभीर प्रकोप देखा गया है। इन कीटों और रोगों ने न केवल फसल की बढ़वार को रोका, बल्कि कुल पैदावार को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। सामान्य वर्षों में जहां एक एकड़ जमीन में औसतन 20 बोरी धान का उत्पादन होता था, वहीं इस वर्ष कई खेतों में यह गिरकर केवल 10 से 12 बोरी तक ही सिमट गया है।
बाजार में बारीक धान के भाव में जोरदार उछाल
उत्पादन में भारी कमी और चावल की बढ़ती मांग के बीच बाजार में बारीक किस्मों के धान की कीमतों में जोरदार तेजी आई है। एचएमटी, श्रीराम और सुंदर जैसी बारीक किस्मों के धान के दाम हाल ही में 4,200 रुपए प्रति क्विंटल से छलांग लगाकर सीधे 5,500 रुपए तक पहुंच गए हैं। केवल बारीक धान ही नहीं, बल्कि मोटे धान के भाव में भी लगातार तेजी दर्ज की जा रही है। बाजार के जानकारों और व्यापारियों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में धान की कीमतों में और अधिक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
खेतों तक पहुंच रहे व्यापारी, मिल रहा अग्रिम भुगतान
बाजार में धान की मांग और कम आपूर्ति को देखते हुए व्यापारी अब सीधे किसानों के खेतों और खलिहानों तक पहुंच रहे हैं। त्योहारों के मौसम में अपनी तात्कालिक आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए कई किसान व्यापारियों से अग्रिम रकम ले रहे हैं। इसके अलावा, कई क्षेत्रों में धान की सरकारी या व्यावसायिक उठाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही व्यापारियों द्वारा किसानों को भुगतान किया जा रहा है। कुछ व्यापारी आपसी शर्तों के आधार पर भी किसानों को एडवांस राशि दे रहे हैं।
कीमतें बढ़ने के बावजूद किसानों को पूरा लाभ नहीं
एक तरफ जहां धान के ऊंचे भाव मिलने से राहत की उम्मीद जताई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ उत्पादन में आई भारी गिरावट और खेती की बढ़ती लागत ने किसानों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर दबाव बना रखा है। गड़चिरोली के किसान दीपक कोटगले का कहना है कि बारीक धान के भाव बढ़ना भले ही सकारात्मक लगे, लेकिन फसलों में रोगों के प्रकोप और बेहद कम बारिश के कारण उत्पादन आधा रह गया है। इसके चलते खेत तैयार करने, फसल की देखभाल करने, कटाई और बंधाई पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी नहीं निकल पा रहा है, जिससे कीमतों में उछाल के बावजूद किसानों की आर्थिक स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हो सका है।