मराठवाड़ा क्षेत्र में गहराते सूखे और भीषण जलसंकट के बीच कांग्रेस पार्टी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए किसानों और खेत मजदूरों के लिए बड़े पैमाने पर आर्थिक सहायता की मांग की है। कांग्रेस की महाराष्ट्र सहप्रभारी रेहाना चिश्ती ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि क्षेत्र के किसान और ग्रामीण त्रस्त हैं, लेकिन शासन स्तर पर अपेक्षित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने मराठवाड़ा के 11 दिवसीय दौरे के अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में हालात बेहद चिंताजनक हैं और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
खरीफ फसलों की बर्बादी और पूंजी डूबने का संकट
कांग्रेस नेता रेहाना चिश्ती ने जानकारी दी कि इस सीजन में किसानों ने खरीफ की बुवाई पर प्रति एकड़ करीब 35 से 40 हजार रुपये खर्च किए थे। हालांकि, समय पर पर्याप्त बारिश न होने के कारण सोयाबीन, कपास और अन्य प्रमुख फसलें तबाह हो गई हैं। स्थिति यह है कि किसानों के लिए खेती में लगाई गई मूल लागत निकालना भी असंभव हो गया है।
उन्होंने वर्तमान में मिल रही पांच हजार रुपये की राहत राशि को नाकाफी बताया और कहा कि इस मामूली मदद से किसानों के जख्मों पर मरहम नहीं लगाया जा सकता। पार्टी का तर्क है कि किसानों को उनके नुकसान का सही आकलन कर बेहतर मुआवजा मिलना चाहिए।
गहराता पेयजल संकट और पशुओं की दुर्दशा
सूखे के साथ-साथ मराठवाड़ा में पीने के पानी का संकट भी विकराल रूप ले चुका है। चिश्ती के अनुसार, कई गांवों में कुएं और बोरवेल पूरी तरह सूख चुके हैं। कुछ क्षेत्रों में तो स्थिति इतनी बदतर है कि ग्रामीणों को 15 दिन में केवल एक बार पानी मिल पा रहा है।
पेयजल की इस भारी कमी का असर न केवल आम नागरिकों बल्कि मवेशियों पर भी पड़ रहा है। कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि प्रभावित गांवों में तत्काल नियमित पेयजल आपूर्ति बहाल की जाए और पशुओं के लिए भी पानी का पर्याप्त प्रबंध किया जाए। चेतावनी दी गई है कि यदि अगले डेढ़ महीने में हालात नहीं सुधरे, तो ग्रामीण सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के लिए विवश हो सकते हैं.
प्रमुख मांगें और राजनीतिक बयानबाजी
क्षेत्रीय दौरों के बाद कांग्रेस ने राज्य सरकार के सामने स्पष्ट मांगें रखी हैं। पार्टी ने प्रत्येक सूखा प्रभावित किसान को एक लाख रुपये और खेत मजदूरों को 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की है। इसके साथ ही फसल बीमा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया है।
प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस की महाराष्ट्र सहप्रभारी के साथ जिला अध्यक्ष किरण पाटील डोणगावकर, शहराध्यक्ष एड. सय्यद अक्रम, वरिष्ठ नेता इब्राहिम पठाण और जगन्नाथ काले समेत कई अन्य स्थानीय पदाधिकारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने सरकार की नीतियों के खिलाफ एकजुटता दिखाई।