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कानपुर के काकादेव में फिर दहला इलाका: विरोध करने पर छात्रों को ईंट से पीटा, पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

कानपुर के काकादेव में फिर दहला इलाका: विरोध करने पर छात्रों को ईंट से पीटा, पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में कानून व्यवस्था को लेकर एक बार फिर से गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर का चर्चित काकादेव थाना क्षेत्र, जो देश भर के युवाओं के लिए सपनों की उड़ान यानी आईआईटी और मेडिकल की कोचिंग का बड़ा केंद्र माना जाता है, इन दिनों खौफ के साये में जी रहा है। यहाँ पुलिस की सुस्त कार्यशैली के चलते दबंगों और हिस्ट्रीशीटरों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें कानून का कोई खौफ नहीं बचा है। ताजा मामला एक बार फिर इसी इलाके से सामने आया है, जहाँ मामूली बात पर दबंगों ने छात्रों को बेरहमी से ईंट-पत्थरों से पीट डाला। इस पूरी घटना का एक भयावह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने आम नागरिकों के मन में डर पैदा कर दिया है।

महज कुछ ही हफ्तों पहले हुई थी एक कारोबारी की निर्मम हत्या

याद दिला दें कि यह वही काकादेव इलाका है जहाँ कुछ समय पहले 5 सितंबर को मानवता को झकझोर देने वाली एक घटना घटी थी। काकादेव थाना क्षेत्र के ओम चौराहे पर कुछ दबंग और हिस्ट्रीशीटर सरेआम सड़क के किनारे पेशाब कर रहे थे। जब स्थानीय कारोबारी अमित गुप्ता ने उन्हें इस अकृत्य से रोका और सार्वजनिक जगह की मर्यादा बनाए रखने की बात कही, तो इन बेलगाम बदमाशों ने विरोध करने पर अमित गुप्ता की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई थी और पुलिस प्रशासन पर भारी दबाव बना था।

उस वक्त पुलिस ने कार्रवाई के नाम पर ढिंढोरा पीटते हुए मुख्य आरोपियों को मुठभेड़ में पकड़ा था और कुछ ने अदालतों में सरेंडर किया था। लेकिन सवाल यह उठता है कि इतनी बड़ी और खौफनाक घटना हो जाने के बावजूद भी काकादेव थाने की स्थानीय पुलिस ने इससे कोई सबक क्यों नहीं सीखा? क्या पुलिस किसी और बड़ी अनहोनी के होने का इंतजार कर रही है?

कोचिंग हब में रातभर लगता है शोहदों और दबंगों का जमावड़ा

काकादेव इलाके को उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के कोने-कोने से आने वाले मेधावी छात्र अपना आशियाना बनाते हैं। यहाँ सैकड़ों की संख्या में हॉस्टल और पीजी हैं जहाँ रहकर छात्र दिन-रात अपनी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे रहते हैं। लेकिन रात ढलते ही इस रिहायशी और शैक्षणिक इलाके का माहौल पूरी तरह से बदल जाता है। सड़कों पर देर रात तक खुली रहने वाली दुकानें और ढाबे असामाजिक तत्वों का अड्डा बन जाते हैं।

  • दबंगों का आतंक: शहर के हिस्ट्रीशीटर और मनचले रात के वक्त इन इलाकों में बेखौफ घूमते हैं।
  • पुलिस गश्त की कमी: कारोबारी की हत्या के बाद भी पुलिस ने नियमित पैदल गश्त करना जरूरी नहीं समझा।
  • खुलेआम कानून की धज्जियां: रात के समय सड़कों पर और दुकानों के बाहर खड़े होकर हुड़दंग मचाना यहाँ आम बात हो गई है।

कागजों तक ही सीमित रह गए उच्चाधिकारियों के सख्त आदेश

कानपुर कमिश्नरेट के अपर पुलिस आयुक्त डॉ. विपिन टाडा ने हाल ही में शहर की सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बेहद सख्त दिशा-निर्देश जारी किए थे। उनके आदेशों में साफ कहा गया था कि रात 11:00 बजे के बाद शहर में कोई भी दुकान या बाजार खुला नहीं रहना चाहिए। इसके साथ ही यह भी चेतावनी दी गई थी कि यदि किसी भी थाना क्षेत्र में तय समय के बाद दुकानें खुली मिलती हैं या सड़कों पर लोग शराब पीते हुए पाए जाते हैं, तो इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित थाना प्रभारी (एसएचओ) और चौकी इंचार्ज जिम्मेदार होंगे और उनके खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

लेकिन विडंबना देखिए कि उच्चाधिकारियों के ये तमाम आदेश केवल कागजी कार्रवाई और फाइलों तक ही सीमित नजर आते हैं। धरातल पर इनका असर शून्य है। काकादेव क्षेत्र में जिस जगह पर कारोबारी की हत्या हुई थी, ठीक उसी इलाके के आसपास एक बार फिर दबंगों ने छात्रों को दौड़ा-दौड़ा कर ईंटों से पीटा। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि स्थानीय पुलिस अधिकारियों को उच्चाधिकारियों के आदेशों का कोई डर नहीं है, क्योंकि मातहतों पर समय पर गाज न गिरने के कारण उनकी कार्यशैली पूरी तरह से लापरवाह हो चुकी है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और जनता का रोष

ताजा वायरल वीडियो के सामने आने के बाद जब मामला तूल पकड़ने लगा, तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वायरल वीडियो को पूरी तरह से संज्ञान में ले लिया गया है। पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और वीडियो में दिख रहे आरोपियों की पहचान की जा रही है। उन्होंने आश्वस्त किया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के दायरे में रहकर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

हालांकि, जनता और स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि सिर्फ बयानों से काम नहीं चलेगा। जब तक काकादेव थाने की लचर पुलिस व्यवस्था में फेरबदल करके लापरवाह पुलिसकर्मियों पर सख्त गाज नहीं गिराई जाती, तब तक यहाँ पढ़ने वाले हजारों छात्रों की सुरक्षा रामभरोसे ही रहेगी। अब देखना यह होगा कि पुलिस इस मामले में केवल औपचारिकता निभाती है या वाकई में इस कोचिंग हब से अपराधियों के नेटवर्क को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर पाती है।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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