उत्तराखंड के धारचूला स्थित उच्च हिमालयी आदि कैलास मंदिर के कपाट 5 नवंबर को बंद हो गए हैं। अब अगले साल मई में होंगे दर्शन।
शीतकालीन अवकाश के चलते अगले साल मई तक स्थगित रहेगी यात्रा
उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित पवित्र आदि कैलास के शिव-पार्वती मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए पांच नवंबर को विधि-विधान के साथ बंद कर दिए गए हैं। अब अगले साल मई माह में ग्रीष्मकाल की शुरुआत होने पर ही श्रद्धालुओं को दोबारा इस पावन स्थल के दर्शन हो सकेंगे। समुद्र तल से लगभग 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित होने के कारण सर्दियों के मौसम में इस पूरे इलाके में भारी बर्फबारी होती है और तापमान अत्यधिक गिर जाता है। मौसम की इसी प्रतिकूल स्थिति और कड़ाके की ठंड को ध्यान में रखते हुए हर साल सर्दियों के दौरान मंदिर के कपाट बंद करने की परंपरा है।
ग्रामीणों और स्थानीय स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार, पांच नवंबर को दोपहर ठीक चार बजे स्थानीय परंपराओं और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मंदिर के कपाट बंद किए गए। इस पवित्र प्रक्रिया के दौरान मंदिर के मुख्य पुजारी वीरेंद्र कुटियाल के अलावा पाल सिंह, गिरीश सिंह और कई अन्य स्थानीय ग्रामीण भी पूरी आस्था के साथ मौजूद रहे। कपाट बंद होने के साथ ही इस वर्ष आदि कैलास की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं का आध्यात्मिक सफर फिलहाल शीतकालीन विश्राम पर चला गया है।
हालांकि, मंदिर के कपाट बंद होने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रियाएं पूरी तरह थमी नहीं हैं। प्रशासन की ओर से इनर लाइन परमिट जारी किए जाने का सिलसिला अभी जारी है। कपाट बंद होने के बाद भी हाल ही में शुक्रवार को 29 श्रद्धालुओं का एक जत्था आदि कैलास दर्शन के लिए रवाना हुआ है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सर्दियों के आगमन के साथ ही जनजीवन और यात्रा मार्ग प्रभावित होते हैं, जिसके कारण चार धाम समेत ऐसे कई उच्च पर्वतीय मंदिरों के कपाट हर साल सर्दियों में बंद कर दिए जाते हैं और ग्रीष्मकाल में इन्हें दोबारा खोला जाता है।