आधुनिक विकास के तमाम दावों और स्मार्ट सिटी की चमक-दमक के बीच ज़मीनी हक़ीक़त कई बार दावों की पोल खोल देती है। ऐसा ही एक गंभीर मामला उत्तर प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र वाराणसी से सामने आया है, जहां बारिश थमने के कई दिन बीत जाने के बाद भी शहर का एक प्रमुख इलाका जलभराव और सीवर के गंदे पानी की त्रासदी झेलने को मजबूर है। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि स्थानीय नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है और लोगों में प्रशासन के प्रति भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
कंदवा वार्ड की इन कॉलोनियों में बना हुआ है नरकीय जीवन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वाराणसी के कंदवा वार्ड के अंतर्गत आने वाली कई प्रमुख कॉलोनियों और रिहायशी इलाकों में हालात बद से बदतर बने हुए हैं। इनमें शिवाजी नगर कॉलोनी, कर्मदेश्वरपुरम, सुरभी नगर, राजीव नगर और पाल बस्ती का नाम प्रमुखता से शामिल है। इन सभी इलाकों में बारिश रुके हुए लंबा वक्त गुजर चुका है, लेकिन सड़कों और गलियों से पानी की एक बूंद भी कम नहीं हुई है।
स्थिति यह है कि सड़कों पर केवल पानी नहीं, बल्कि सीवर का बदबूदार और दूषित पानी जमा है। इस कारण इन कॉलोनियों में रहने वाले हजारों लोगों का रोजमर्रा का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सुबह दफ्तर जाने वाले लोग हों, स्कूल जाने वाले छोटे बच्चे हों या फिर घर लौटने वाले बुजुर्ग, हर किसी को इस गंदे पानी से होकर ही गुजरना पड़ रहा है।
पैदल चलना भी हुआ दूभर, दोपहिया वाहन चालक हो रहे हैं दुर्घटनाओं का शिकार
जलभराव की इस गंभीर समस्या के चलते स्थानीय नागरिकों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पैदल चलने वाले लोगों के पास दूसरा कोई विकल्प न होने के कारण उन्हें मजबूरी में सीवर के इस दूषित पानी में पैर रखकर निकलना पड़ रहा है। इसके अलावा, दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक साबित हो रही है।
सड़क पर पानी भरा होने के कारण गड्ढों का अंदाजा नहीं लग पाता है, जिसकी वजह से कई वाहन चालक फिसलकर गिर चुके हैं और चोटिल हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को सूचित करने का प्रयास किया, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।
संक्रामक बीमारियों और महामारियों का मंडरा रहा है बड़ा खतरा
लंबे समय तक रिहायशी इलाकों में गंदा पानी खड़ा रहने से अब स्वास्थ्य को लेकर एक बहुत बड़ा संकट पैदा हो गया है। जमा हुए सीवर के पानी से उठने वाली भीषण दुर्गंध ने आसपास के लोगों का सांस लेना तक दूभर कर दिया है। इसके अलावा, इस ठहरे हुए पानी में मच्छरों का लार्वा तेजी से पनप रहा है, जिससे मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी गंभीर वेक्टर जनित बीमारियों के फैलने की आशंका कई गुना बढ़ गई है।
चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के दूषित पानी के संपर्क में आने से चर्म रोग (स्किन इन्फेक्शन) और पेट से जुड़ी बीमारियां भी तेजी से फैल सकती हैं। स्थानीय लोग इस बात से बेहद डरे हुए हैं कि अगर समय रहते इस पानी की निकासी नहीं की गई, तो पूरा इलाका किसी बड़ी बीमारी की चपेट में आ सकता है।
प्रशासन और स्मार्ट सिटी के दावों पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में भी सुगबुगाहट तेज हो गई है। बाबा साहेब अंबेडकर वाहिनी के महानगर अध्यक्ष अमन यादव ने कंदवा वार्ड की इस बदतर स्थिति को लेकर वाराणसी नगर निगम और संबंधित सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जब शहर के भीतर इस तरह की तस्वीरें सामने आती हैं, तो तथाकथित 'स्मार्ट सिटी' के तमाम दावे कागजी साबित होने लगते हैं। जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है और जिम्मेदार अधिकारी एसी कमरों में बैठकर विकास के झूठे आंकड़े परोस रहे हैं। अमन यादव ने जोर देकर कहा कि इस तरह की लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और दोषी अमले की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
तत्काल निरीक्षण और स्थायी समाधान की उठी पुरजोर मांग
प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद स्थानीय नेताओं और जनता ने प्रशासन के सामने कुछ बेहद सख्त और जरूरी मांगें रखी हैं। केवल ऊपरी तौर पर पानी निकाल देने या खानापूर्ति करने की औपचारिकता से काम नहीं चलेगा, बल्कि इस समस्या के मूल कारणों की गहराई से जांच होनी चाहिए।
- निरीक्षण: नगर निगम और जलकल विभाग के उच्च अधिकारियों को तत्काल कंदवा वार्ड की इन कॉलोनियों का स्थलीय निरीक्षण करना चाहिए।
- सफाई अभियान: सीवर लाइनों की युद्धस्तर पर सफाई हो और बंद पड़ी नालियों के जालों को तुरंत खोला जाए ताकि पानी का प्राकृतिक बहाव शुरू हो सके।
- तकनीकी खामियों का दूर होना: जलनिकासी व्यवस्था में जो भी तकनीकी बाधाएं या इंजीनियरिंग डिफेक्ट्स हैं, उन्हें विशेषज्ञों की देखरेख में दुरुस्त किया जाए।
- भविष्य के लिए कार्ययोजना: केवल तात्कालिक राहत देने के बजाय एक ऐसी स्थायी व्यवस्था बनाई जाए जिससे भविष्य में कभी भी बारिश के बाद ऐसी नारकीय स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
फिलहाल, कंदवा वार्ड की जनता प्रशासनिक अमले की नींद टूटने का इंतजार कर रही है। लोगों की सिर्फ एक ही मांग है कि उन्हें विकास के हसीन सपनों के बजाय कम से कम जीने लायक साफ-सुथरा और सुरक्षित माहौल मुहैया कराया जाए, ताकि वे एक सामान्य जीवन जी सकें। अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद वाराणसी का नगर निगम प्रशासन कितनी जल्दी हरकत में आता है और इन जलभराव से घिरे नागरिकों को राहत दे पाता है।