सार्वजनिक हुए अदालती दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि युद्ध के दौरान ट्रंप प्रशासन ने ईरानी नागरिकों के निर्वासन को लेकर ईरान के साथ गुप्त बातचीत की थी।
युद्ध के माहौल में ईरानी नागरिकों के निर्वासन को लेकर वाशिंगटन में सामने आया बड़ा कूटनीतिक और कानूनी विवाद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ईरान के साथ युद्ध जारी रहने के दौरान ईरानी नागरिकों को उनके देश वापस भेजने या निर्वासित करने के मुद्दे पर तेहरान के साथ गुप्त बातचीत की थी। हाल ही में सार्वजनिक किए गए अदालती दस्तावेजों से इस बात का खुलासा हुआ है। इस खुलासे के बाद अमेरिका की आव्रजन नीतियों और शरणार्थियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
तीसरे देश के रास्ते निर्वासन की थी योजना
सामने आए अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ने अक्टूबर के मध्य तक ईरानी नागरिकों को सीधे भेजने के बजाय किसी तीसरे देश के रास्ते से निर्वासित करने की एक गुप्त योजना बनाई थी। युद्ध और कूटनीतिक तनाव के बीच इस तरह की गुप्त बातचीत और निर्वासन के प्रयासों ने मानवाधिकार संगठनों और कानूनी हलकों में चिंता बढ़ा दी है।
अदालत का कड़ा रुख और निर्देश
इस पूरे मामले की सुनवाई करते हुए अमेरिकी अदालत की न्यायाधीश एना रेयेस ने कड़ी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मौजूदा युद्ध की स्थिति और ईरान के भीतर चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर वहां की सरकार की सख्त कार्रवाई के बीच इन नागरिकों को वापस भेजना उनकी जान के लिए सीधा और गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। न्यायाधीश ने इस मामले में सरकार को कड़े निर्देश देते हुए आदेश दिया है कि निर्वासन की अंतिम योजना तैयार होने पर अदालत को 24 घंटे पहले सूचना दी जानी चाहिए तथा किसी भी कार्रवाई को अंजाम देने से कम से कम पांच दिन पहले लिखित नोटिस देना अनिवार्य होगा।
गोपनीय जानकारी साझा करने के गंभीर आरोप
इस मुकदमे में अमेरिकी आव्रजन एजेंसियों पर यह गंभीर आरोप भी लगाया गया है कि वे अमेरिका में रह रहे ईरानी शरणार्थियों की गोपनीय और संवेदनशील जानकारियां सीधे तौर पर ईरानी सरकार के साथ साझा कर रही हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों का खंडन करते हुए अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने इन्हें खारिज किया है। वहीं, अमेरिकी न्याय विभाग के वकीलों का पक्ष रखते हुए कहा गया है कि सरकार मौजूदा कानूनों के तहत मिले वैध निर्वासन आदेशों का पूरी तरह से पालन कर रही है।
निर्वासन उड़ानों और समयसीमा के आंकड़े
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रक्रिया के तहत सितंबर 2025, दिसंबर 2025 तथा जनवरी 2026 के दौरान 100 से अधिक ईरानी नागरिकों को निर्वासित करने के लिए विशेष उड़ानों की व्यवस्था की गई थी। अदालत के नए आदेशों के आने के बाद अब इन निर्वासन प्रक्रियाओं पर और अधिक कानूनी निगरानी रखी जा रही है।