वैश्विक मंच पर पाकिस्तान का असली चेहरा बेनकाब
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक बार फिर भारत ने अपने तीखे और तार्किक बयानों से पड़ोसी देश पाकिस्तान को कटघरे में खड़ा कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र के एक महत्वपूर्ण सत्र के दौरान भारत के कूटनीतिक प्रतिनिधियों ने पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को दुनिया के सामने उजागर किया। भारत ने साफ शब्दों में कहा कि एक तरफ जहां पाकिस्तान वैश्विक मंचों पर शांति और सुरक्षा की बात करता है, वहीं दूसरी तरफ उसके शासन में आतंकवाद को पनाह दी जाती है और रात के अंधेरे में सीमाओं पर आतंक का खेल खेला जाता है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर के देश सीमा पार आतंकवाद (Cross-Border Terrorism) और क्षेत्रीय अस्थिरता को लेकर गहरी चिंता व्यक्त कर रहे हैं। भारत ने दो टूक अंदाज में स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। जब तक आतंकवाद के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से नेस्तनाबूद नहीं किया जाता, तब तक किसी भी प्रकार की सार्थक बातचीत संभव नहीं है।
'दिन में अमन, रात में आतंक' - भारत का कड़ा प्रहार
संयुक्त राष्ट्र की बैठकों में अक्सर भारत और पाकिस्तान के बीच तीखी बहस देखने को मिलती है, लेकिन इस बार भारत का रुख बेहद आक्रामक और तथ्यात्मक रहा। भारतीय राजनयिक ने दुनिया के सबसे बड़े कूटनीतिक मंच से पाकिस्तान की नीतियों पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि जो देश खुद आतंकवाद का केंद्र रहा हो, वह मानवाधिकारों और शांति का पाठ नहीं पढ़ा सकता।
भारत ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि:
- पाकिस्तान अपनी धरती पर पलने वाले आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रहा है।
- आतंकवाद को कूटनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की नीति अब दुनिया के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है।
- भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और किसी भी खतरे का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है।
- क्षेत्रीय शांति के लिए यह जरूरी है कि वैश्विक समुदाय प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर कड़े कदम उठाए।
कूटनीतिक मोर्चे पर पाकिस्तान की बढ़ती तन्हाई
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की इस आक्रामक और स्पष्ट कूटनीति के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान लगातार अलग-थलग पड़ रहा है। आज दुनिया के अधिकांश देश आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के रुख के साथ खड़े हैं। पश्चिमी देशों से लेकर एशियाई मंचों तक, हर जगह यह माना जा रहा है कि आतंकवाद मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है और इसके वित्तपोषण (Terror Funding) को रोकना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है।
पाकिस्तान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर राग अलापता रहा है, लेकिन भारत हर बार उसके एजेंडे को नाकाम करते हुए उसे आतंकवाद के मुद्दे पर ही घेर देता है। इस बार भी जब पाकिस्तान की तरफ से भ्रामक और निराधार बयानबाजी की गई, तो भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने तुरंत और कड़े शब्दों में उसका प्रतिकार किया।
आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति
भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी विदेश नीति और सुरक्षा रणनीति में यह साफ कर दिया है कि देश आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति पर काम कर रहा है। उरी और बालाकोट के बाद से भारत ने यह साबित कर दिया है कि देश की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जरूरत पड़ने पर घर में घुसकर जवाब दिया जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के इस बयान ने एक बार फिर यह संदेश दे दिया है कि भारत केवल अपनी घरेलू सुरक्षा को लेकर ही सतर्क नहीं है, बल्कि वह वैश्विक मंचों पर भी आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत और निर्णायक आवाज बनकर उभर रहा है।
वैश्विक शांति के लिए बड़ी चुनौती
आतंकवादी संगठनों को मिलने वाला समर्थन न केवल दक्षिण एशिया की शांति के लिए खतरा है, बल्कि यह पूरी दुनिया की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करता है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से अपील की है कि वे उन देशों पर शिकंजा कसें जो आतंकवाद को अपनी विदेश नीति का हिस्सा मानते हैं। जब तक आतंकवाद के आकाओं को वैधानिक और आर्थिक मोर्चे पर सजा नहीं मिलती, तब तक दुनिया से इस नासूर को खत्म करना मुमकिन नहीं होगा।
इस पूरी घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत अब कूटनीतिक मोर्चे पर किसी भी दबाव में आने वाला नहीं है। वह अपनी बात को पूरी दृढ़ता और प्रमाण के साथ दुनिया के सामने रखना जानता है, जिससे पाकिस्तान जैसे देशों की नीतियां एक्सपोज हो रही हैं।