होर्मुज स्ट्रेट में पनामा और लाइबेरिया के झंडे वाले दो तेल टैंकरों पर लिमपेट माइन्स से हमले की खबर सामने आई है। इन जहाजों पर कुल 29 भारतीय नाविक सवार थे, जो केंद्रीय मंत्री के अनुसार पूरी तरह सुरक्षित हैं।
रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाने का मामला सामने आया है। समुद्री सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, इस क्षेत्र में फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-ईरान तनाव के बाद से जहाजों पर विस्फोटकों के जरिए किया गया यह पहला सफल हमला माना जा रहा है। इन हमलों में पनामा और लाइबेरिया के झंडे वाले दो बड़े तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया, जिन पर कुल 29 भारतीय नाविक सवार थे। गनीमत यह रही कि इन हमलों में किसी भी भारतीय नाविक को चोट नहीं आई है।
केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 29 और 30 अक्टूबर को हुई दो अलग-अलग घटनाओं में इन टैंकरों को निशाना बनाया गया था। सरकार पूरी स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार जहाज प्रबंधन कंपनियों के संपर्क में बनी हुई है।
टैंकरों पर कैसे हुआ हमला और क्या हुआ नुकसान?
समुद्री सुरक्षा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सबसे पहले गुरुवार, 29 अक्टूबर को लाइबेरिया के झंडे वाले विशाल तेल टैंकर 'एमटी अर्ज़ाना' को निशाना बनाया गया। इस जहाज पर दो भारतीय नाविक सवार थे। इसके बाद शुक्रवार को पनामा के झंडे वाले कच्चे तेल के टैंकर 'एमटी लुईस 1' पर हमला बोला गया। इस दूसरे जहाज पर सबसे अधिक 27 भारतीय नाविक मौजूद थे।
सूत्रों ने बताया कि 'एमटी लुईस 1' के बाहरी ढांचे पर दो लिमपेट माइन्स लगाकर विस्फोट किया गया। लिमपेट माइन्स ऐसे विशेष विस्फोटक उपकरण होते हैं जिन्हें चुंबक या अन्य तरीकों से सीधे जहाज के बाहरी हिस्से से चिपकाया जा सकता है। इस विस्फोट के कारण जहाज के इंजन रूम में आग लग गई थी, जिसके चलते उसने कुछ समय के लिए काम करना बंद कर दिया था। हालांकि, चालक दल और प्रबंधन ने समय रहते आग पर पूरी तरह काबू पा लिया, जिसके बाद टैंकर अपने अगले गंतव्य की ओर रवाना हो गया। होर्मुज जैसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री मार्ग पर छोटी नावों के जरिए इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार और भू-राजनीतिक हलचल
इस ताजा घटनाक्रम और क्षेत्रीय तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर तुरंत असर पड़ा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमत में ढाई प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह बढ़कर 118 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं, अमेरिका के वेस्ट टेक्सास में भी तेल की कीमत दो प्रतिशत बढ़कर 104 डॉलर हो गई है।
दूसरी ओर, अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार, वाशिंगटन में भू-राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। 'वाल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों पर विस्तृत जानकारी दी। इस उच्च स्तरीय बैठक में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ चेयरमैन जनरल डैन कैन और अन्य कैबिनेट सदस्य भी शामिल थे। अमेरिकी मीडिया में यह चर्चा भी है कि तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद अमेरिका इस मामले में कोई बड़ा कदम उठा सकता है। उधर, ईरानी नौसेना ने भी दावा किया है कि उसके जवाबी हमलों में दुश्मन का एक पनडुब्बी ड्रोन डूब गया है और कुल चार जहाज माइंस की चपेट में आए हैं, जबकि दो को जब्त कर लिया गया है।