ग्रेटर नोएडा के अत्याधुनिक इंडिया एक्सपो मार्ट में इस समय उत्सव जैसा माहौल है। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और पारंपरिक धरोहर के साथ-साथ यहाँ के लजीज जायके भी वैश्विक पटल पर अपनी अमिट छाप छोड़ रहे हैं। इस महाआयोजन में इस बार जिस एक चीज ने सबसे ज्यादा देशी और विदेशी मेहमानों का ध्यान अपनी ओर खींचा है, वह है उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर मेरठ की पारंपरिक रेवड़ी, गजक और खस्ता नानखटाई। जब विदेशी मेहमानों ने पहली बार इस पारंपरिक मिष्ठान का स्वाद चखा, तो उनके मुंह से बरबस ही निकल पड़ा— "वाह मेरठ!"
अंतरराष्ट्रीय मंच पर मेरठ के स्वाद की गूंज
सितंबर 2026 के आखिरी हफ्ते में चल रहे इस प्रतिष्ठित ट्रेड शो में इस बार स्थानीय व्यंजनों को प्रमोट करने के लिए एक विशेष 'एक जनपद एक व्यंजन' (ODOP Food Court) का निर्माण किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश के उन पारंपरिक खाद्य उत्पादों को दुनिया के सामने लाना है, जो पीढ़ियों से अपनी खास रेसिपी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन जिन्हें अब तक वैश्विक बाजार नहीं मिल पाया था।
मेरठ से इस बड़े मंच के लिए विशेष रूप से तीन प्रमुख फर्मों और उनके उस्ताद कारीगरों का चयन किया गया है। इनमें एमएच स्वीट सेंटर के हाशिम, प्रसिद्ध स्वीट शॉप के सद्दाम और पारंपरिक रेवड़ी-गजक उत्पादक यामीन शामिल हैं। इन सभी को प्रशासन की ओर से ट्रेड शो में बिल्कुल मुफ्त स्टॉल उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि वे बिना किसी आर्थिक दबाव के अपने हुनर और स्वाद का प्रदर्शन कर सकें।
विदेशी मेहमानों के लिए एक अनोखा अनुभव
ट्रेड शो के फूड कोर्ट में जब मेरठ के स्टॉल पर गुड़ और चीनी की चाशनी में लिपटी तिल की सौंधी खुशबू फैलनी शुरू हुई, तो खरीदार स्वतः ही खींचे चले आए। भारत के विभिन्न राज्यों के कारोबारियों के अलावा अमेरिका, यूरोप और अन्य देशों से आए विदेशी प्रतिनिधियों ने भी इस स्टॉल का रुख किया।
जब विदेशी मेहमानों ने पारंपरिक तरीके से हाथ से बनी गुड़ की गजक और कुरकुरी रेवड़ी को चखा, तो उनके चेहरे के हाव-भाव देखने लायक थे। उनके लिए यह स्वाद पूरी तरह से नया और अद्भुत था। कई विदेशी मेहमानों ने न केवल इसे खाया, बल्कि इसके बनाने की विधि, इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों और इसकी लंबी शेल्फ लाइफ के बारे में भी विस्तार से जानकारी जुटाई।
नानखटाई ने भी बटोरी सुर्खियां
सिर्फ रेवड़ी और गजक ही नहीं, बल्कि मेरठ की पारंपरिक नानखटाई ने भी आगंतुकों को अपनी ओर आकर्षित किया। विक्रेता हाशिम बताते हैं कि उनकी नानखटाई वर्षों से मेरठ और आसपास के इलाकों में अपनी खास पहचान रखती है, लेकिन इसे इतने बड़े ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर पेश करने का मौका पहली बार मिला है।
हाशिम के अनुसार, "जब लोग काउंटर पर आते हैं और नानखटाई का एक टुकड़ा मुंह में रखते हैं, तो उसकी खस्ता बनावट और मक्खन जैसी खुशबू उन्हें तुरंत हमारे बचपन की यादों से जोड़ देती है। विदेशी खरीदारों ने भी इसकी जमकर तारीफ की है और इसके बड़े पैमाने पर आयात-निर्यात को लेकर दिलचस्पी दिखाई है।"
कारोबारियों की उम्मीदों को पंख
स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए चल रही सरकारी पहलों का असर अब जमीन पर साफ दिखाई दे रहा है। विक्रेता सद्दाम का कहना है कि इस प्रकार के आयोजनों से छोटे और पारंपरिक कारोबारियों को सीधे बड़े खरीदारों (Buyers) से मिलने का मौका मिलता है।
सद्दाम ने बताया, "हम सिर्फ अपने उत्पाद बेचने के लिए यहां नहीं आए हैं, बल्कि हमारा मकसद एक ऐसा बिजनेस नेटवर्क तैयार करना है जो हमारे स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को देश की सीमाओं से पार ले जाए। विदेशी मेहमानों से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया ने हमारे पूरे गिरोह और परिवार का हौसला बढ़ा दिया है। अब हमें पूरा विश्वास है कि आने वाले त्योहारी सीजन में मेरठ की गजक की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचेगी।"
व्यापारिक संपर्कों की नई शुरुआत
उद्योग विभाग के प्रयासों से मेरठ के इन उद्यमियों के लिए यह मंच व्यापार की नई दिशा तय कर रहा है। उपायुक्त उद्योग अमरेश पांडे ने इस पूरी प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए बताया कि स्थानीय कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने लाना ही इस ट्रेड शो का मुख्य ध्येय था।
उन्होंने कहा, "हमारे पास ऐसे कई पारंपरिक उत्पाद हैं जिनकी गुणवत्ता दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है, लेकिन मार्केटिंग और ग्लोबल एक्सपोजर की कमी के कारण वे स्थानीय बाजारों तक ही सिमट कर रह जाते थे। ओडीओपी और इस विशेष ट्रेड शो के माध्यम से अब इन उत्पादों को नए खरीदार मिल रहे हैं, पैकेजिंग सुधर रही है और निर्यात की संभावनाएं तेजी से खुल रही हैं।"
निष्कर्ष: परंपरा से आधुनिक बाजार तक का सफर
मेरठ की रेवड़ी और गजक की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि पारंपरिक हुनर को सही मंच और आधुनिक पैकेजिंग का साथ मिल जाए, तो वह दुनिया के किसी भी कोने में अपनी धाक जमा सकता है। ग्रेटर नोएडा के इस महाकुंभ में मेरठ के मिष्ठान ने जो मिठास घोली है, वह आने वाले दिनों में स्थानीय अर्थव्यवस्था और छोटे व्यापारियों के लिए तरक्की के नए रास्ते जरूर खोलेगी।