बिहार के सभी सरकारी विद्यालयों में बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र स्कूल अभिलेख में रखने और बैंक खाता खुलवाने का निर्देश दिया गया है। 31 दिसंबर तक चलेगा अभियान।
बिहार के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों के लिए जन्म प्रमाण पत्र स्कूल के रिकॉर्ड में रखना और राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खुलवाना अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षा विभाग ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला कार्यक्रम अधिकारियों को आधिकारिक निर्देश जारी किए हैं।
शिक्षा विभाग के निदेशक (प्रशासन) द्वारा भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि केंद्र सरकार वर्ष 2014 से वित्तीय समावेशन अभियान के तहत नागरिकों के बैंक खाते खुलवाने पर विशेष जोर दे रही है। इसी के तहत स्कूली स्तर पर भी बच्चों के खाते होना आवश्यक माना गया है, क्योंकि स्कूल में नामांकन के समय और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए इसकी जरूरत होती है। विभाग के इन दोनों निर्देशों को आगामी 31 दिसंबर तक एक विशेष अभियान के रूप में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
प्रधानाध्यापकों की जिम्मेदारी और बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया
जारी निर्देशों के अनुसार, सभी राजकीय और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को अपने नजदीकी सरकारी अथवा राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखाओं के प्रबंधकों से संपर्क करना होगा। इसके बाद स्कूल में नामांकित सभी बच्चों का एकल या संयुक्त बैंक खाता खुलवाना सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी होगी।
खाता खुलवाने की इस प्रक्रिया में उन विद्यार्थियों को सबसे पहले प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्हें विभिन्न प्रकार की छात्रवृत्तियां प्रदान की जानी हैं। बच्चों के बैंक खाते सक्रिय होने से सरकार की ओर से मिलने वाली कल्याणकारी योजनाओं की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके खातों में भेजने में आसानी होगी।
जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए स्थानीय निकायों से समन्वय
जिन बच्चों के पास अभी जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है, उनके दस्तावेज तैयार करवाने के लिए प्रधानाध्यापकों को अपने क्षेत्र के स्थानीय जनप्रतिनिधियों और निकायों से सहयोग लेने को कहा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसके लिए ग्राम पंचायत के मुखिया अथवा पंचायत सेवक से संपर्क किया जाएगा, जबकि शहरी इलाकों में संबंधित नगर निकायों के माध्यम से जन्म प्रमाण पत्र बनवाए जाएंगे। इन सभी प्रमाण पत्रों को सुरक्षित रूप से विद्यालय के आधिकारिक अभिलेखों में संधारित किया जाना है ताकि भविष्य में किसी भी प्रशासनिक प्रक्रिया में असुविधा न हो।