पश्चिम एशिया यानी मिड-ईस्ट की धरती पर एक बार फिर से बारूद के ढेर पर बैठने जैसे हालात बनते नजर आ रहे हैं। साल 2023 के अक्टूबर महीने में इजरायल पर हुए खौफनाक हमलों की यादें अभी दुनिया के जेहन से मिटी भी नहीं थीं कि उससे भी बड़े और खतरनाक सैन्य षड्यंत्र की सुगबुगाहट तेज हो गई है। खुफिया रिपोर्टों और अंतरराष्ट्रीय जानकारों के मुताबिक, ईरान एक ऐसा चक्रव्यूह रच रहा है, जिसके तहत इजरायल पर एक साथ चारों तरफ से ऐसा समन्वित प्रहार किया जा सके, जो पिछले तमाम हमलों के रिकॉर्ड ध्वस्त कर दे।
ईरान की अगुवाई में बन रहा 'एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस' का खूंखार जाल
मध्य पूर्व की भू-राजनीति में ईरान लंबे समय से अपने प्रॉक्सी नेटवर्क्स के जरिए रणनीतिक बढ़त हासिल करने की कोशिश करता रहा है। इस कड़ी में लेबनान का हिजबुल्लाह, यमन के हूती विद्रोही और गाजा पट्टी का हमास संगठन ईरान के मुख्य हथियार हैं। हालिया खुफिया इनपुट बताते हैं कि तेहरान में इन सभी संगठनों के शीर्ष कमांडर्स के बीच कई दौर की गुप्त बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों का एकमात्र एजेंडा इजरायल की सुरक्षा को एक साथ कई मोर्चों पर भेदना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार रणनीति केवल छिटपुट रॉकेट दागने तक सीमित नहीं होगी। ईरान इस बार एक 'मल्टी-फ्रंट ऑल-आउट वॉर' यानी चौतरफा युद्ध का ताना-बाना बुन रहा है, जिसमें इजरायल की आयरन डोम और डेविड स्लिंग जैसी अत्याधुनिक रक्षा प्रणाली को भी मात देने की तकनीकी तैयारी की जा रही है।
7 अक्टूबर की तबाही को पीछे छोड़ने की नापाक कोशिश
बीते समय में 7 अक्टूबर को जो कुछ इजरायल की सीमा के भीतर हुआ था, उसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था। उस हमले में सैकड़ों बेकसूर नागरिकों को निशाना बनाया गया था, जिसके बाद इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने गाजा में जो सैन्य अभियान शुरू किया, वह आज भी जारी है। लेकिन अब जो सीक्रेट प्लान सामने आ रहा है, वह उससे भी कई गुना ज्यादा विध्वंसक बताया जा रहा है।
- हिजबुल्लाह की भारी मिसाइलें: लेबनान की सीमा पर तैनात हिजबुल्लाह के पास ऐसे सटीक गाइडेड प्रोजेक्टाइल और मिसाइलें हैं जो इजरायल के अंदरूनी शहरों और सामरिक ठिकानों को मिनटों में मलबे में तब्दील कर सकती हैं।
- हूती विद्रोहियों का लाल सागर पर शिकंजा: यमन के रास्ते लाल सागर से होने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बाधित करने के साथ-साथ इजरायल के दक्षिणी छोर (विशेषकर इलियट बंदरगाह) पर ड्रोन और मिसाइल हमलों को और तेज करने की योजना है।
- हमास का रीग्रुपिंग प्लान: भारी नुकसान उठाने के बावजूद गाजा के भीतर हमास के बचे हुए लड़ाके और подзем सुरंगों (Underground Tunnels) का नेटवर्क एक बार फिर से संगठित होने की कोशिश कर रहा है।
इजरायल का रुख और वैश्विक चिंताएं
इस खतरनाक साजिश की भनक लगते ही इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद और आईडीएफ ने अपनी चौकसी को चरम स्तर पर पहुंचा दिया है। इजरायली प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री स्पष्ट कर चुके हैं कि देश की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाया जा सकता है। इजरायल ने पहले ही चेतावनी दी है कि यदि ईरान या उसके किसी भी प्रॉक्सी ने दुस्साहस किया, तो उसका जवाब ऐसा होगा जिसकी कल्पना तेहरान ने कभी नहीं की होगी।
इस बीच, अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों ने भी पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की है। अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत और एयरक्राफ्ट कैरियर इस क्षेत्र में लगातार गश्त कर रहे हैं ताकि किसी भी बड़े युद्ध को भड़कने से रोका जा सके। हालांकि, कूटनीतिक स्तर पर हो रही तमाम कोशिशें फिलहाल नाकाफी साबित होती दिख रही हैं क्योंकि जमीन पर सुलग रही आग कभी भी एक भयानक विस्फोट का रूप ले सकती है।
क्या विश्व युद्ध की ओर बढ़ रहा है मिड-ईस्ट?
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि अगर ईरान और उसके सहयोगी अपने इस सीक्रेट प्लान को अमलीजामा पहनाने में कामयाब होते हैं, तो यह संघर्ष केवल इजरायल और फिलिस्तीन तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें क्षेत्रीय शक्तियां और वैश्विक महाशक्तियां भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खिंच सकती हैं। साल 2026 के इन शुरुआती महीनों में दुनिया एक बार फिर से शीत युद्ध के बाद के सबसे बड़े भू-राजनीतिक संकट के मुहाने पर खड़ी है।
आने वाले कुछ दिन पश्चिम एशिया के भविष्य के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं। क्या कूटनीति इस आसन्न महाविनाश को टाल पाएगी या फिर इतिहास एक बार फिर खून से लिखा जाएगा? इस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।