नागपुर के आसमान में उड़ान भरने वाले यात्रियों के लिए एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आ रही है। मध्य भारत के सबसे अहम रणनीतिक और व्यावसायिक केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहे नागपुर के डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय विमानक्षेत्र (Nagpur Airport) के विस्तार का रास्ता अब पूरी तरह से साफ हो चुका है। पिछले कई सालों से इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बनी भारतीय वायु सेना (IAF) की जमीन का पेंच आखिरकार सुलझ गया है।
रक्षा मंत्रालय और राज्य के वरिष्ठ नेतृत्व के बीच हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में इस बाबत ऐतिहासिक सहमति बन गई है। इसके तहत एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण और नए अत्याधुनिक टर्मिनल के निर्माण के लिए रक्षा मंत्रालय ने 27 एकड़ जमीन आधिकारिक रूप से हस्तांतरित करने का निर्णय लिया है। इस बड़े फैसले के बाद अब नागपुर एयरपोर्ट के कायाकल्प की गति तेज होने की पूरी उम्मीद है, जिसे वर्ष 2029 तक पूरा किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।
सालों से अटका था मामला, उच्चस्तरीय बैठक में बनी बात
किसी भी बड़े बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के प्रोजेक्ट में ज़मीन का अधिग्रहण और रक्षा भूमि का हस्तांतरण सबसे पेचीदा प्रक्रिया मानी जाती है। नागपुर एयरपोर्ट के साथ भी कुछ ऐसा ही था। टर्मिनल के विस्तार और नए पैसेंजर बोर्डिंग ब्रिज, कार्गो हब तथा पार्किंग बे के निर्माण के लिए वायु सेना के कब्जे वाली जमीन की सख्त आवश्यकता थी।
लंबे समय से इस प्रस्ताव पर मंथन चल रहा था, लेकिन हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और महाराष्ट्र के प्रमुख नेताओं के बीच हुई निर्णायक बैठक ने इस गतिरोध को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया। इस बैठक में दोनों पक्षों के बीच आपसी समन्वय और क्षेत्रीय विकास की आवश्यकता को सर्वोपरि रखते हुए 27 एकड़ जमीन के ट्रांसफर पर मुहर लगा दी गई। प्रशासनिक गलियारों में इस समझौते को एक बड़ा कूटनीतिक और विकासात्मक कदम माना जा रहा है।
कैसा होगा नया टर्मिनल? क्या मिलेंगी सुविधाएं
प्रस्तावित मास्टरप्लान के अनुसार, नए टर्मिनल के बन जाने के बाद नागपुर एयरपोर्ट की यात्री क्षमता में बेतहाशा वृद्धि होगी। वर्तमान समय में जो टर्मिनल मौजूदा यात्री भार को संभालने के लिए नाकाफी साबित हो रहा था, उसकी जगह एक वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर लेगा।
- आधुनिक तकनीक: पैसेंजर चेक-इन और लगेज ड्रॉप के लिए पूरी तरह से ऑटोमेटेड और स्मार्ट सिस्टम।
- बढ़ी हुई क्षमता: एक साथ कई विमानों की पार्किंग और मूवमेंट के लिए आधुनिक एप्रन एरिया।
- कार्गो हब का विकास: मध्य भारत में लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स सप्लाई चेन को गति देने के लिए डेडीकेटेड कार्गो सुविधाएं।
- यात्री सुविधाएं: अंतरराष्ट्रीय स्तर के लाउंज, ड्युटी-फ्री शॉप्स, और पर्यावरण अनुकूल (Eco-friendly) ग्रीन बिल्डिंग डिजाइन।
2029 तक पूरा करने का है लक्ष्य
परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि रक्षा मंत्रालय से ज़मीन मिलने के बाद अब निर्माण कार्यों की डीपीआर (Detailed Project Report) और टेंडर प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि तय समय सीमा यानी वर्ष 2029 तक इस भव्य टर्मिनल का निर्माण कार्य पूरी तरह से संपन्न हो जाए।
विदर्भ क्षेत्र के उद्योगपतियों, व्यापारियों और आम नागरिकों ने इस फैसले का जोरदार स्वागत किया है। उनका मानना है कि नए टर्मिनल के बनने से नागपुर में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और विदेशी निवेशकों का आना-जाना भी सुगम हो जाएगा।
आर्थिक विकास को मिलेगा नया पंख
नागपुर को देश का 'टाइगर कैपिटल' और लॉजिस्टिक्स हब भी कहा जाता है। ऐसे में एक आधुनिक अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का होना यहाँ की अर्थव्यवस्था के लिए बूस्टर डोज का काम करेगा। मुंबई और पुणे जैसे महानगरों पर हवाई यात्रा का दबाव कम करने में भी यह नया टर्मिनल एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
अब जबकि रक्षा मंत्रालय की ओर से हरी झंडी मिल चुकी है, तो यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि ज़मीन पर काम कितनी तेजी से आगे बढ़ता है और क्या यह प्रोजेक्ट अपने निर्धारित 2029 के डेडलाइन पर खरा उतर पाता है या नहीं। फिलहाल, नागपुरवासियों के लिए यह जश्न मनाने का एक बड़ा मौका है।