Breaking
► घरेलू गैस सिलेंडर बुकिंग में बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती ► राहुल गांधी का आरोप, अंकिता भंडारी के माता-पिता को इंडिया गेट से हिरासत में लिया गया ► उत्तर प्रदेश में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराना हुआ मुश्किल ► पूर्णिया में दुर्गा पूजा और रावण वध को लेकर पुलिस अलर्ट, SSP ने किया पंडालों का निरीक्षण ► बाराबंकी: एमएलसी चुनाव और सीएम योगी की रैली को लेकर भाजपा ने कसी कमर ► विकसित महाराष्ट्र 2047: परिवहन विस्तार के लिए उच्च स्तरीय टास्क फोर्स गठित ► देवप्रयाग में बड़ा हादसा: खाई में गिरी कार, चालक समेत दो की मौत ► IVRI में इंटर्न डॉक्टरों का 10 दिन का आंदोलन खत्म, 13 हजार स्टाइपेंड पर बनी सहमति ► बिहार: गलत अनुसंधान और फर्जी मुकदमे पर कोर्ट सख्त, डीएसपी और थानाध्यक्ष पर कार्रवाई का आदेश ► बरेली की रश्मि छाबड़ा ने घटाया 95 किलो वजन, जीता 'मिस एशिया' और 'मिस इंडिया' का खिताब ► घरेलू गैस सिलेंडर बुकिंग में बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती ► राहुल गांधी का आरोप, अंकिता भंडारी के माता-पिता को इंडिया गेट से हिरासत में लिया गया ► उत्तर प्रदेश में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराना हुआ मुश्किल ► पूर्णिया में दुर्गा पूजा और रावण वध को लेकर पुलिस अलर्ट, SSP ने किया पंडालों का निरीक्षण ► बाराबंकी: एमएलसी चुनाव और सीएम योगी की रैली को लेकर भाजपा ने कसी कमर ► विकसित महाराष्ट्र 2047: परिवहन विस्तार के लिए उच्च स्तरीय टास्क फोर्स गठित ► देवप्रयाग में बड़ा हादसा: खाई में गिरी कार, चालक समेत दो की मौत ► IVRI में इंटर्न डॉक्टरों का 10 दिन का आंदोलन खत्म, 13 हजार स्टाइपेंड पर बनी सहमति ► बिहार: गलत अनुसंधान और फर्जी मुकदमे पर कोर्ट सख्त, डीएसपी और थानाध्यक्ष पर कार्रवाई का आदेश ► बरेली की रश्मि छाबड़ा ने घटाया 95 किलो वजन, जीता 'मिस एशिया' और 'मिस इंडिया' का खिताब

पुणे में पर्यावरण बचाने की बड़ी पहल: 6500 नए पौधे लगेंगे और 500 पेड़ों का होगा पुनरोपण

पुणे में पर्यावरण बचाने की बड़ी पहल: 6500 नए पौधे लगेंगे और 500 पेड़ों का होगा पुनरोपण

पुणे शहर के विकास और पर्यावरण संतुलन को एक नई दिशा देने के लिए पुणे महानगरपालिका (PMC) और आनंदवन फाउंडेशन ने हाथ मिलाया है। आधुनिक समय में जब कंक्रीट के जंगल तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में यह संयुक्त उपक्रम शहर के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आया है। इस पहल के तहत येवलेवाड़ी इलाके में बड़े पैमाने पर हरियाली बढ़ाने का काम शुरू कर दिया गया है, जिससे आने वाले समय में पुणे का पारिस्थितिकी तंत्र और अधिक मजबूत होगा।

येवलेवाड़ी में 7 हेक्टेयर जमीन पर होगा हरित विस्तार

इस महत्वाकांक्षी योजना के केंद्र में येवलेवाड़ी स्थित सर्वे नंबर 18 की करीब 7 हेक्टेयर जमीन है। इस विशाल क्षेत्र को नए पौधों के रोपण और पेड़ों के सुरक्षित स्थानांतरण के लिए चिन्हित किया गया है। योजना के अनुसार, यहाँ कुल 6,500 नए पौधे रोपे जाएंगे, जो कुछ ही वर्षों में एक घने जंगल का रूप ले लेंगे। इसके अलावा, शहर के अन्य हिस्सों से विकास कार्यों के चलते प्रभावित होने वाले 500 बड़े पेड़ों को काटा नहीं जाएगा, बल्कि उनका वैज्ञानिक तरीके से पुनरोपण (Transplantation) किया जाएगा।

इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और कानूनी रूप से दुरुस्त रखने के लिए, आनंदवन फाउंडेशन ने अपनी देखरेख वाली इस जमीन का उपयोग करने के लिए औपचारिक सहमति दे दी है। इस सहमति पत्र की एक प्रति पुणे के उपवनसंरक्षक (Deputy Conservator of Forests) को भी भेज दी गई है, ताकि पर्यावरण नियमों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जा सके।

कोथरूड सड़क परियोजना और पर्यावरण संतुलन

यह पूरा वृक्षारोपण अभियान सीधे तौर पर कोथरूड में चल रही एक अहम बुनियादी ढांचा परियोजना से जुड़ा हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में कोथरूड का तेजी से पुनर्विकास हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप यहाँ की आबादी और वाहनों की संख्या में भारी उछाल आया है। स्थानीय लोगों को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए ग. अ. कुलकर्णी पथ से कर्वे पुतला डीपी रोड को जोड़ने वाली एक नई सड़क परियोजना प्रस्तावित है।

विकास की इस दौड़ में जब सड़क निर्माण का कार्य होगा, तो रास्ते में आने वाले करीब 462 पेड़ प्रभावित हो सकते हैं। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि इनमें से जितने भी पेड़ पुनरोपण योग्य हैं, उन्हें उखाड़कर येवलेवाड़ी की सुरक्षित जमीन पर दोबारा लगाया जाएगा। वहीं, इस परियोजना से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई के लिए कई गुना अधिक यानी 6,500 नए पौधे लगाकर पर्यावरण संतुलन को बनाए रखा जाएगा।

यातायात के दबाव को कम करने की रणनीति

पुणे महानगरपालिका के पथ विभाग के अधिकारी राजेश बनकर ने इस प्रोजेक्ट के तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि शहर का विस्तार तेजी से हो रहा है, लेकिन इसके साथ ही ट्रैफिक जाम एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। प्रस्तावित सड़क का मुख्य उद्देश्य कोथरूड के आंतरिक यातायात को व्यवस्थित करना और मौजूदा मुख्य सड़कों व चौकों पर वाहनों के अत्यधिक दबाव को कम करना है।

उन्होंने आगे कहा, "यह नई सड़क न केवल स्थानीय यातायात को अलग-अलग वैकल्पिक मार्गों पर बांटेगी, बल्कि शहर की 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' को भी अभूतपूर्व मजबूती देगी। हम यह अच्छी तरह समझते हैं कि शहर के बुनियादी ढांचे का विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों पहिये एक साथ चलने चाहिए। आनंदवन फाउंडेशन ने इस नेक काम के लिए जो जमीन उपलब्ध कराई है, वह सराहनीय है। पौधे लगाने के बाद उनकी दीर्घकालीन देखभाल और उनके बड़े होने तक संवर्धन की पूरी जिम्मेदारी पुणे महानगरपालिका की होगी।"

आनंदवन फाउंडेशन की दूरदर्शी सोच

आनंदवन फाउंडेशन के संस्थापक सचिव भूपेश शर्मा ने इस साझेदारी पर अपने विचार रखते हुए कहा कि प्राकृतिक हरियाली को बचाना और बढ़ाना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने विश्वास जताया कि उचित देखरेख और मॉनिटरिंग के जरिए इस उपक्रम को एक टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाला मॉडल बनाया जाएगा।

शर्मा ने यह भी रेखांकित किया कि यह प्रस्तावित सड़क और हरियाली का यह गलियारा पुणे की बढ़ती सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। इसमें खास तौर पर नल स्टॉप से वारजे और माणिकबाग तक प्रस्तावित पुणे मेट्रो के नए 4ए विस्तार को भी ध्यान में रखा गया है, जो आने वाले दिनों में लाखों यात्रियों के सफर को सुगम बनाएगा।

दीर्घकालिक देखभाल और नागरिकों की जिम्मेदारी

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में अक्सर वृक्षारोपण अभियान सिर्फ कागजों पर या उद्घाटन के समय तक सीमित रह जाते हैं, लेकिन इस बार पीएमसी और आनंदवन फाउंडेशन ने पौधों के रोपण के साथ-साथ उनकी 'सर्वाइवल रेट' (जीवित रहने की दर) पर भी विशेष जोर दिया है। पौधों को पानी देने, उनकी निराई-गुड़ाई करने और मवेशियों से बचाने के लिए पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि जिस तरह से पुणे में वाहनों की संख्या बढ़ रही है, उससे वायु प्रदूषण का स्तर भी चिंताजनक रूप से ऊपर जा रहा है। ऐसे में येवलेवाड़ी का यह नया हरा-भरा पैच शहर के फेफड़ों की तरह काम करेगा और हवा की गुणवत्ता को सुधारने में मदद करेगा।

भविष्य के लिए एक मिसाल

पुणे महानगरपालिका और आनंदवन फाउंडेशन का यह सहयोगात्मक मॉडल देश के अन्य महानगरों के लिए भी एक बेहतरीन उदाहरण पेश करता है। यह साबित करता है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो कंक्रीट के विकास और प्रकृति के संरक्षण के बीच एक बेहतरीन तालमेल बिठाया जा सकता है। आने वाले कुछ महीनों में जब ये 6,500 पौधे और 500 पुनरोपित पेड़ अपनी जड़ें गहरी करेंगे, तो येवलेवाड़ी का यह भूभाग एक जीवंत और समृद्ध इकोसिस्टम के रूप में उभरकर सामने आएगा।

About the Author

रोली सिंह

रोली सिंह

Writer

रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

Read More

अगली खबर पढ़ें:

आगे पढ़ें →