राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो चुकी है और उत्तर प्रदेश के आगामी स्नातक विधान परिषद (एमएलसी) चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों ने भी अपनी कमर कस ली है। इसी कड़ी में मंगलवार को धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी वाराणसी में अखिल भारतीय कायस्थ महासभा की एक अहम और उच्चस्तरीय क्षेत्रीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य केंद्रबिंदु आने वाले स्नातक एमएलसी चुनाव में संगठन की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना और एक अचूक चुनावी रणनीति तैयार करना रहा।
वाराणसी के ग्रैंड कॉन्टिनेंटल होटल में जुटे दिग्गजों
वाराणसी कैंट स्थित प्रतिष्ठित ग्रैंड कॉन्टिनेंटल होटल में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता अखिल भारतीय कायस्थ महासभा, उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. इंद्रसेन श्रीवास्तव ने की। बैठक की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें उत्तर प्रदेश के कुल आठ अलग-अलग जिलों से आए प्रमुख पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं ने भारी संख्या में हिस्सा लिया। सभा कक्ष में सुबह से ही चुनावी तैयारियों और संगठनात्मक मुद्दों को लेकर गंभीर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था, जो देर शाम तक जारी रहा।
संगठन के शीर्ष नेतृत्व का यह मानना है कि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव आम चुनावों से काफी अलग होते हैं, जहाँ हर एक मतदाता का व्यक्तिगत संपर्क और वैचारिक जुड़ाव मायने रखता है। यही कारण है कि महासभा ने इस बार पारंपरिक प्रचार के तरीकों से हटकर जमीनी स्तर पर एक मजबूत नेटवर्क तैयार करने का निर्णय लिया है।
मतदाता संपर्क और बूथ स्तर की कार्ययोजना पर मंथन
बैठक के दौरान मुख्य रूप से मतदाता सूची के पुनरीक्षण, नए स्नातकों को जोड़ने और उनके साथ सीधा संवाद स्थापित करने पर गहन विचार-विमर्श किया गया। विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की मौजूदा चुनावी जमीनी हकीकत को मंच के सामने रखा। सभी ने इस बात पर एकमत होकर जोर दिया कि जब तक हर एक योग्य मतदाता तक संगठन की पहुंच नहीं होगी, तब तक चुनावी वैतरणी पार करना आसान नहीं होगा।
- क्षेत्रवार समन्वय: आठों जिलों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के लिए विशेष प्रभारियों की नियुक्ति पर चर्चा हुई।
- घर-घर संपर्क अभियान: उच्च शिक्षित मतदाताओं और प्रोफेशनल्स के बीच जाकर संगठन के विजन को साझा करने की रूपरेखा तैयार की गई।
- युवा और महिला सहभागिता: चुनाव प्रचार में युवाओं की ऊर्जा और महिला विंग की सक्रियता का पूरा लाभ उठाने का निर्णय लिया गया।
दिग्गज नेताओं की मौजूदगी ने बढ़ाई सरगर्मी
इस महत्वपूर्ण बैठक में राष्ट्रीय स्तर से लेकर प्रांतीय और स्थानीय स्तर के कई दिग्गज चेहरे मौजूद रहे, जिनकी उपस्थिति ने इस आयोजन को बेहद खास बना दिया। बैठक में मुख्य रूप से राष्ट्रीय कार्यकारिणी अध्यक्ष डॉ. मुकेश श्रीवास्तव और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकेश सहारा ने शिरकत की। उनके साथ-साथ प्रदेश अध्यक्ष डॉ. इंद्रसेन श्रीवास्तव और खुद स्नातक एमएलसी प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा की मौजूदगी ने कार्यकर्ताओं में एक नया जोश भर दिया।
सभा को संबोधित करते हुए नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह चुनाव केवल एक सीट जीतने का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज के प्रबुद्ध वर्ग की आवाज को विधान परिषद के पटल पर मजबूती से उठाने का एक बड़ा अवसर है। उन्होंने सभी पदाधिकारियों से आपसी मतभेदों को दरकिनार कर पूरी एकजुटता के साथ मैदान में उतरने का आह्वान किया।
संगठनात्मक मजबूती और आपसी संवाद पर जोर
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार के संशय या असमंजस से बचने के लिए जिलों के बीच नियमित संवाद बना रहना चाहिए। इसके लिए एक कंट्रोल रूम या समन्वय समिति जैसी व्यवस्था बनाने पर भी विचार किया गया, जो हर जिले की गतिविधियों पर पैनी नजर रखेगी और हाईकमान को रिपोर्ट करेगी।
इस अवसर पर पूर्व मंत्री एवं कैंट प्रभारी रिबू श्रीवास्तव, प्रदेश युवा अध्यक्ष अमन श्रीवास्तव, जिला अध्यक्ष एडवोकेट अनूप श्रीवास्तव, प्रदेश महामंत्री राकेश, प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल, पंकज और श्रीकांत जैसे प्रमुख नेता भी उपस्थित रहे। इन सभी नेताओं ने अपने-अपने अनुभवों के आधार पर चुनावी वैतरणी पार करने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव दिए, जिन्हें आगामी कार्ययोजना में शामिल करने पर सहमति बनी।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय
वाराणसी में हुई इस बैठक के बाद से राजनीतिक विश्लेषक भी सक्रिय हो गए हैं। स्नातक एमएलसी चुनाव हमेशा से ही प्रतिष्ठा का प्रश्न रहे हैं, जहाँ हर राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन अपनी ताकत झोंक देता है। कायस्थ महासभा द्वारा इतनी सुनियोजित तरीके से आठ जिलों के पदाधिकारियों की बैठक बुलाना और एक ठोस खाका तैयार करना यह साबित करता है कि आगामी चुनाव में मुकाबला बेहद दिलचस्प और कड़ा होने वाला है।
बैठक के अंत में सभी पदाधिकारियों ने संकल्प लिया कि वे अपने-अपने जिलों में जाकर इस कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाएंगे और संगठन के हर एक कार्यकर्ता को सक्रिय करेंगे। अब देखना यह होगा कि वाराणसी से उठी इस चुनावी हुंकार का असर उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में कितना गहरा पड़ता है और यह रणनीति चुनाव परिणाम में कितनी कारगर साबित होती है।