Breaking
► एमपी टीईटी: डेढ़ लाख सरकारी शिक्षकों में से केवल 20 हजार ने भरे फॉर्म, परीक्षा से दूरी की ये है वजह ► इंदौर के मारोठिया बाजार की तीन मंजिला दुकान में भीषण आग, लाखों का स्टॉक खाक ► रजनीकांत की 'जेलर 2' ने भारत में पार किया 500 करोड़ का आंकड़ा, वैश्विक कमाई 765 करोड़ के पार ► जंक फूड सिर्फ मोटापा ही नहीं, बच्चों के दिमाग को भी कर रहा है प्रभावित ► IND vs NZ 4th T20: सीरीज पर कब्जा जमाने के बाद आज चौथे मुकाबले में उतरेगा भारत, प्लेइंग-11 में बदलाव के आसार ► पटना साहिब में 360वें प्रकाश पर्व की तैयारियां तेज, टेंट सिटी और ड्रोन शो होंगे मुख्य आकर्षण ► एनएच-9 पर ऑटो चालकों की मनमानी से लगा भीषण जाम, नोएडा-गाजियाबाद पुलिस बेबस ► उत्तराखंड विधानसभा चुनाव: धामी सरकार ने गैरसैंण सत्र के बहाने पेश की चुनावी घोषणापत्र की झलक ► मधेपुरा का मधुकरचक काली मंदिर: जहाँ कोसी की धारा मोड़ने की है मान्यता ► उत्तराखंड में 'अर्णब' का असर: पांच जिलों में ऑरेंज अलर्ट, बारिश और बर्फबारी से ठंड बढ़ी ► एमपी टीईटी: डेढ़ लाख सरकारी शिक्षकों में से केवल 20 हजार ने भरे फॉर्म, परीक्षा से दूरी की ये है वजह ► इंदौर के मारोठिया बाजार की तीन मंजिला दुकान में भीषण आग, लाखों का स्टॉक खाक ► रजनीकांत की 'जेलर 2' ने भारत में पार किया 500 करोड़ का आंकड़ा, वैश्विक कमाई 765 करोड़ के पार ► जंक फूड सिर्फ मोटापा ही नहीं, बच्चों के दिमाग को भी कर रहा है प्रभावित ► IND vs NZ 4th T20: सीरीज पर कब्जा जमाने के बाद आज चौथे मुकाबले में उतरेगा भारत, प्लेइंग-11 में बदलाव के आसार ► पटना साहिब में 360वें प्रकाश पर्व की तैयारियां तेज, टेंट सिटी और ड्रोन शो होंगे मुख्य आकर्षण ► एनएच-9 पर ऑटो चालकों की मनमानी से लगा भीषण जाम, नोएडा-गाजियाबाद पुलिस बेबस ► उत्तराखंड विधानसभा चुनाव: धामी सरकार ने गैरसैंण सत्र के बहाने पेश की चुनावी घोषणापत्र की झलक ► मधेपुरा का मधुकरचक काली मंदिर: जहाँ कोसी की धारा मोड़ने की है मान्यता ► उत्तराखंड में 'अर्णब' का असर: पांच जिलों में ऑरेंज अलर्ट, बारिश और बर्फबारी से ठंड बढ़ी

जंक फूड सिर्फ मोटापा ही नहीं, बच्चों के दिमाग को भी कर रहा है प्रभावित

जंक फूड सिर्फ मोटापा ही नहीं, बच्चों के दिमाग को भी कर रहा है प्रभावित

जामा नेटवर्क ओपन में प्रकाशित नई रिसर्च से खुलासा, प्रोसेस्ड फूड देखने पर बच्चों के दिमाग का रिवॉर्ड सिस्टम अधिक सक्रिय होता है

स्कूल के बाद चिप्स का पैकेट खाना, शाम के वक्त बिस्कुट या बर्गर जैसे स्नैक्स का सेवन करना आम लग सकता है, लेकिन हाल ही में सामने आई एक वैज्ञानिक रिसर्च इस आदत पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आमतौर पर अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स यानी जंक फूड को केवल शारीरिक मोटापे से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन नई स्टडी ने इसके और बच्चों के मानसिक तंत्र के बीच एक सीधा कनेक्शन उजागर किया है। इसके मुताबिक, ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करने वाले बच्चों में आने वाले एक साल के भीतर शारीरिक चर्बी और बीएमआई तेजी से बढ़ सकता है।

46 स्वस्थ बच्चों पर की गई स्टडी

इस महीने 'जामा नेटवर्क ओपन' पत्रिका में छपी रिपोर्ट के अनुसार, इस रिसर्च में 46 ऐसे बच्चों को शामिल किया गया जो अध्ययन की शुरुआत में पूरी तरह से स्वस्थ वजन वाले थे। वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन बच्चों की दैनिक आहार शैली में प्रोसेस्ड फूड्स की मात्रा अधिक थी, जब उन्हें कुकीज और फ्रेंच फ्राइज जैसी लजीज चीजें दिखाई गईं, तो उनके दिमाग का रिवॉर्ड, मोटिवेशन और आदतों से जुड़ा हिस्सा जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो गया। दिमाग के इस तीव्र रिएक्शन के कारण ही अगले एक वर्ष के दौरान उन बच्चों के बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) और बॉडी फैट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके अलावा, जो बच्चे नियमित रूप से अधिक प्रोसेस्ड फूड खाते थे, उनकी कमर का आकार भी सामान्य से अधिक पाया गया।

क्या जंक फूड बच्चों के दिमाग को बदल रहा है?

इन चौंकाने वाले नतीजों ने बचपन के मोटापे को लेकर चिकित्सा जगत में नई चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस बात पर भी बहस छिड़ गई है कि क्या बच्चों का दिमाग खाने पर जिस तरह से प्रतिक्रिया देता है, वही उनके तेजी से वजन बढ़ने की मुख्य वजह है? विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के खानपान को लगातार जारी रखने से बच्चों में 'हैबिचुअल ईटिंग' यानी खाने की अस्वस्थ आदतों को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, मौजूदा शोध से यह आधिकारिक तौर पर साबित नहीं होता कि बच्चे भोजन के प्रत्यक्ष तौर पर आदी हो चुके हैं या जंक फूड सीधे तौर पर उनके मस्तिष्क की संरचना में कोई स्थायी बदलाव कर रहा है।

सिर्फ चीनी नहीं, फैट और कार्बोहाइड्रेट का मेल भी जिम्मेदार

शोधकर्ताओं ने यह भी गहराई से जांचा कि इस पूरी प्रक्रिया के लिए कौन से तत्व मुख्य रूप से उत्तरदायी हैं। अध्ययन में सामने आया कि इसके लिए केवल चीनी अकेली जिम्मेदार नहीं है। बाजार में मिलने वाले कई प्रोसेस्ड फूड्स में वसा (फैट्स) और कार्बोहाइड्रेट का ऐसा मेल होता है जो मस्तिष्क में तीव्र रिवॉर्ड रिएक्शन पैदा करता है। हालांकि, जब रिसर्चर्स ने अतिरिक्त चीनी (ऐडेड शुगर) की मात्रा को ध्यान में रखकर आंकड़ों का विश्लेषण किया, तो प्रोसेस्ड फूड और दिमाग के रिएक्शन के बीच का संबंध कुछ हद तक कमजोर नजर आया। इससे यह संकेत मिलता है कि बच्चों के शरीर और दिमाग पर पड़ने वाले इस नकारात्मक असर के पीछे कई अन्य कारक भी संयुक्त रूप से जिम्मेदार हो सकते हैं।

About the Author

अल्का सिंह

अल्का सिंह

Senior Content Writer

अल्का सिंह स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े विषयों पर गहन शोध के साथ लेखन करती हैं। उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को केवल सामान्य जानकारी ही नहीं, बल...

Read More

ज़रूर पढ़ें (You May Also Like)

अगली खबर पढ़ें:

आगे पढ़ें →