मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में प्रशासनिक अमले और आम जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से आयोजित की जाने वाली साप्ताहिक जनसुनवाई एक बार फिर सुर्खियों में है। प्रशासनिक मुख्यालय में आयोजित इस हालिया जनसुनवाई में जिले के दूर-दराज के इलाकों से पहुंचे आम नागरिकों ने अपनी समस्याओं का पिटारा कलेक्टर के सामने खोला। इस दौरान कुल 63 ऐसे मामले सामने आए, जिन पर प्रशासनिक प्रमुख ने बेहद संवेदनशीलता दिखाते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को त्वरित जांच और समयसीमा के भीतर निराकरण के सख्त निर्देश दिए हैं।
जैतहरी केल्हौरी में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का मामला गरमाया
जनसुनवाई के दौरान सबसे प्रमुख और बड़ा मामला जैतहरी जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत केल्हौरी से सामने आया। ग्राम पंचायत के सरपंच रामपाल सिंह लहरु और सचिव संजय सिंह परिहार ने संयुक्त रूप से एक लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसमें सरकारी जमीन पर बेजा कब्जा करने का गंभीर आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, खसरा नंबर 1595/1 की कुल 4.268 हेक्टेयर भूमि पूरी तरह से शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज है, लेकिन इस पर स्थानीय कुछ प्रभावशाली लोगों ने अवैध रूप से कब्जा जमा रखा है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पंचायत स्तर पर भी कड़े कदम उठाए गए थे। सरपंच और सचिव ने कलेक्टर को बताया कि गत 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित ग्रामसभा की विशेष बैठक में इस जमीन से अवैध कब्जा हटाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था। पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस बहुमूल्य सरकारी भूमि को फौरन अतिक्रमण मुक्त कराया जाए, ताकि इसका उपयोग ग्रामीणहित के कार्यों में किया जा सके।
मिड-डे मील रसोइया को बिना सूचना हटाने पर सवाल
प्रशासनिक सुनवाई में केवल जमीन विवाद ही नहीं, बल्कि रोजगार से जुड़े मानवीय पहलू भी सामने आए। कोतमा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले लहसुई गांव की रहने वाली राबिया ने एक लिखित आवेदन देकर अपनी पीड़ा बयां की।
राबिया ने प्रशासनिक अधिकारियों को बताया कि उनका चयन 3 अक्टूबर 2013 को शासकीय माध्यमिक विद्यालय लहसुई में मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) योजना के तहत रसोइया के पद पर हुआ था। वह पूरी निष्ठा के साथ इस पद पर कार्य कर रही थीं और इस साल 1 जुलाई तक निरंतर अपनी सेवाएं दे रही थीं। राबिया का मुख्य आरोप है कि विद्यालय प्रबंधन या संबंधित अधिकारियों ने उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना और बिना किसी ठोस वजह के अचानक रसोइया के पद से हटा दिया। उन्होंने कलेक्टर से गुहार लगाई है कि इस एकतरफा और अन्यायपूर्ण फैसले को तुरंत रद्द किया जाए और उन्हें सम्मान के साथ दोबारा उनके पद पर बहाल किया जाए।
बैटरी वाली ट्राइसाइकिल और पीएम किसान योजना की मांग
जनसुनवाई में सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। हर आवेदन के पीछे एक अलग कहानी और संघर्ष जुड़ा था:
- मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल की गुहार: अनूपपुर शहर के वार्ड नंबर 2 में रहने वाली जुगून्ती बाई ने अपनी शारीरिक असमर्थता को दूर करने के लिए कलेक्टर से बैटरी वाली ट्राइसाइकिल (मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल) उपलब्ध कराने का औपचारिक आवेदन दिया।
- पीएम किसान सम्मान निधि: जैतहरी क्षेत्र के सुलखारी गांव के निवासी सोनशाह राठौर ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ दिलाए जाने की मांग उठाई, ताकि उन्हें आर्थिक संबल मिल सके।
- बीपीएल राशन कार्ड: केल्हौरी के ही रहने वाले पुष्पराज ढीमर ने गरीबी रेखा (BPL) के तहत आने वाले राशन कार्ड में अपना नाम जोड़े जाने के लिए गुहार लगाई।
बिजली, कृषि अनुदान और मुआवजा से जुड़े अन्य प्रमुख आवेदन
विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों ने अपनी बुनियादी जरूरतों और अधूरी पड़ी सरकारी सहायता को लेकर भी अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया:
ग्राम पंचायत दुलहरा के रहने वाले रूपलाल कोरी ने अपने क्षेत्र में नए विद्युत पोल स्थापित किए जाने की मांग की, ताकि बिजली आपूर्ति सुचारू हो सके। वहीं, पुष्पराजगढ़ तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम करपा के जीवन नायक ने कृषि विभाग के माध्यम से रीपर मशीन पर मिलने वाली अनुदान राशि का लाभ दिलाने की अपील की।
एसईसीएल (SECL) से जुड़े मुआवजे का मामला भी अनूपपुर तहसील के ग्राम बकही की ललिया बाई ने उठाया। उन्होंने अपनी भूमि के अधिग्रहण के एवज में एसईसीएल प्रबंधन से उचित मुआवजा राशि दिलाए जाने की मांग की। इसके अलावा, ग्राम पड़री के गुड्डा सिंह ने गांव में नया विद्युत ट्रांसफार्मर स्थापित कराने और कोतमा वार्ड क्रमांक 10 के लक्ष्मण सोनी ने स्वेच्छानुदान मद से आर्थिक सहायता राशि प्रदान किए जाने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया।
कलेक्टर ने दिए प्राथमिकता के आधार पर निराकरण के निर्देश
एक के बाद एक सामने आ रही कुल 63 शिकायतों को पूरी तल्लीनता के साथ सुनने के बाद जिला कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनसुनवाई में आने वाले प्रत्येक नागरिक की समस्या का समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से समाधान होना चाहिए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों — जैसे राजस्व, शिक्षा, विद्युत वितरण कंपनी, कृषि और पंचायत राज — के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे इन 63 आवेदनों की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करें और प्राथमिकता के आधार पर इनका निराकरण सुनिश्चित करें।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की जनसुनवाई से न केवल आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान होता है, बल्कि शासन और जनता के बीच का फासला भी कम होता है। अब देखना यह होगा कि इन निर्देशों के बाद ज़मीनी स्तर पर कितनी जल्दी राहत पहुंचती है।